यूपीआई ट्रांजैक्शंस के लिए नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट फ्रेमवर्क के लागू होने की तारीख को आगे बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 किए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है। त्योहारी सीजन के दौरान देश के व्यापारियों और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को तैयारी करने के लिए पर्याप्त और्स समय देने के उद्देश्य से यह बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि नए नियमों के तहत भी छोटे व्यापारियों और पर्सन-टू-पर्सन यानी व्यक्तिगत ट्रांजैक्शंस पर शून्य एमडीआर ही लागू रहेगा। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी पहले स्पष्ट किया था कि बहुत मामूली शुल्क से डिजिटल ट्रांजैक्शन की कुल वॉल्यूम पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है – सूत्र
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यूपीआई पर एमडीआर की तारीख को इसलिए आगे बढ़ाया जा सकता है ताकि व्यापारियों और पेमेंट सिस्टम को पूरी तैयारी करने का और अधिक वक्त मिल सके। हालांकि, इस मामले पर अभी तक कोई भी आधिकारिक और अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सूत्रों ने यह भी साफ किया है कि इसके घोषित फ्रेमवर्क में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। बता दें कि अभी यूपीआई लागू होने की आधिकारिक तारीख 15 अक्टूबर 2026 तय की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की कानूनी चुनौतियां और सरकार का पक्ष
यह तमाम जानकारी ऐसे वक्त में सामने आई है जब यूपीआई के नए फ्रेमवर्क को लेकर सरकार को कुछ कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बीते 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया था, जिसमें व्यक्ति से व्यापारी के बीच होने वाले लेनदेन पर एमडीआर लागू करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय, आरबीआई और एनपीसीआई को नोटिस जारी कर चार हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया है।
व्यापारी लगातार कर रहे हैं एमडीआर का विरोध
दरअसल, नए प्रस्ताव के तहत 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर प्रस्तावित किया गया है, जबकि 75 हजार रुपये या उससे ज्यादा के पेमेंट पर 300 रुपये का एमडीआर लगेगा। हालांकि, छोटे व्यापारियों और व्यक्तिगत लेनदेन यानी पर्सन टू पर्सन पेमेंट पर एमडीआर पूरी तरह जीरो रहेगा। इस एमडीआर की घोषणा के बाद से ही देश भर के व्यापारी लगातार इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। इसी के चलते गत दो अक्टूबर को देश के कई हिस्सों में व्यापारियों ने ‘नो यूपीआई डे’ भी मनाया था, जिसके बाद अब सरकार इस पर नरमी बरतते हुए तारीख आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है।







