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रॉयल अल्बर्ट हॉल में गूंजा भारतीय सितार का जादू, ऋषभ रिखीराम शर्मा की प्रस्तुति ने मोहा मन

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लंदन। लंदन के विश्वप्रसिद्ध रॉयल अल्बर्ट हॉल में युवा और प्रतिभाशाली सितार वादक ऋषभ रिखीराम शर्मा की शानदार प्रस्तुति ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति की गहरी छाप छोड़ी। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे दर्शकों से खचाखच भरे इस प्रतिष्ठित कॉन्सर्ट हॉल में ऋषभ की सितार वादन की प्रस्तुति को दर्शकों ने बेहद सराहा। कार्यक्रम के लिए टिकट पूरी तरह बिक चुके थे। लंदन जैसे अंतरराष्ट्रीय शहर में भारतीय सितार के प्रति दर्शकों का यह उत्साह भारतीय संगीत की वैश्विक लोकप्रियता को दर्शाता है।

ऋषभ रिखीराम शर्मा प्रसिद्ध रिखी राम परिवार से आते हैं। उनका परिवार पीढ़ियों से देश के दिग्गज संगीतकारों के लिए सितार निर्माण की परंपरा से जुड़ा रहा है। संगीत की इसी समृद्ध विरासत और वर्षों की साधना का प्रभाव ऋषभ की प्रस्तुति में भी दिखाई दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में ऋषभ ने दुनिया भर से आए दर्शकों को भारतीय परंपरा में श्राद्ध और पितृ पक्ष के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने अपने जीवन में गुरु और परिवार के योगदान को याद करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले उन्होंने भारत जाकर अपनी माताजी का श्राद्ध किया था, जबकि दो दिन पहले उनके गुरु और दादाजी का भी श्राद्ध था। इस अवसर पर उन्होंने अपने माता-पिता, गुरु और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि आज वे जो कुछ भी हैं, वह उनके मार्गदर्शन, आशीर्वाद और संस्कारों की वजह से हैं।

भारतीय संस्कृति की इसी भावनात्मक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि के बीच ऋषभ ने जब सितार के तार छेड़े तो पूरा वातावरण भारतीय संगीत की दिव्यता से भर उठा। विशेष रूप से उनके द्वारा प्रस्तुत शिव तांडव स्तोत्र ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सितार के सुरों में भगवान शिव के तांडव की ऊर्जा और आध्यात्मिक अनुभूति का अद्भुत संगम दिखाई दिया। प्रस्तुति के दौरान ऐसा अनुभव हुआ मानो राधा-कृष्ण यमुना किनारे रास रचा रहे हों, भगवान शिव कैलाश पर तांडव कर रहे हों और भगवान राम एवं माता सीता के विवाह का दिव्य दृश्य साकार हो उठा हो।

ऋषभ की प्रस्तुति ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की उस शक्ति को सामने रखा, जो बिना भाषा की बाधा के दुनिया भर के लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ सकती है। उनकी कम उम्र में हासिल की गई यह उपलब्धि संगीत के प्रति उनकी गहरी साधना, अनुशासन और समर्पण को दर्शाती है।

ऋषभ से मुलाकात को भी बेहद सुखद अनुभव बताते हुए उनकी प्रतिभा की सराहना की गई। कहा गया कि इतनी कम उम्र में संगीत के प्रति ऐसी साधना और समर्पण ईश्वर की प्रेरणा और आशीर्वाद के बिना संभव नहीं है। उनके सितार के सुरों में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है।

रॉयल अल्बर्ट हॉल में ऋषभ रिखीराम शर्मा की इस प्रस्तुति ने न केवल लंदन के दर्शकों का मन जीता, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की वैश्विक पहचान को भी और मजबूत किया। उनकी प्रतिभा और साधना के लिए उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई गई कि वे आने वाले समय में भारतीय संगीत और संस्कृति को दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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