हिंदी सिनेमा में एक्टर देव आनंद ने जो छाप छोड़ी है, उसके निशां आज भी सिनेमा के झरोखों से ताजा दिखाई देते हैं। यह कहना गलत नहीं कि देव आनंद ने ना केवल अपनी अदाओं और अदाकारी का दर्शकों को लोहा मनवाया था। बल्कि अपने व्यक्तित्व और स्टाइल से भी दर्शकों का दिल जीता था। उनका किरदार उनके असल जीवन से बिल्कुल भी अलग नहीं था।
फिल्म इंडस्ट्री में यह सितारा ना केवल पर्दे पर चमका, बल्कि वास्तविक जीवन में भी इस सितारे ने खूब प्यार और प्रसिद्धि पाई। आज इस एवरग्रीन एक्टर की 100वीं जयंती है। इस मौके पर हम देव साहब के जीवन से जुड़े कुछ खास पलों को आपके सामने साझा करने जा रहे हैं…

- देव साहब का नाम आज भी जब घर के बड़ों के सामने लिया जाता है, तो वे उनके किस्से साझा करना कतई नहीं भूलते। वह वास्तविक अदाकार उन्हें ही मानकर चलते हैं। उनकी मोहब्बत की कहानियों से लेकर उनकी एक्टिंग के किस्से आज भी खूब सुने जा सकते हैं।
- यह पुरानी फिल्मों का वही हीरो है, जिसके लिए लड़कियां जान देने तक के लिए तैयार रहती थीं। देव की झलक पाने के लिए लड़कियों में होड़ लगी रहती थी। ऐसा कहा जाता है कि जब कभी देव आनंद की गाड़ी फर्राटा मारकर सड़क से निकलती तो लड़कियां उस धूल को बतौर सिंदूर सिर में लगा लिया करती थीं।
- उनकी दीवानगी का एक किस्सा यह भी है कि जब देव आनंद काला कोट पहनकर निकलते थे तो लड़कियां उनके लुक से इतना ज्यादा इंप्रेस हो जाया करती थीं कि वे छत से कूदने के लिए तैयार रहतीं। इस दीवानगी के चलते ही देव ने काले कोट में बाहर निकलना बंद कर दिया था।
- हसीनाओं के राजकुमार की प्रेम कहानियां भी बड़ी गजब रही हैं। साल 1940 का दशक था जब पहली बार देव की मुलाकात एक्ट्रेस सुरैया से हुई। उस दौरान वह फिल्म ‘विद्या’ की शूटिंग कर रहे थे। देव की पहली झलक में ही सुरैया उन्हें दिल दे बैठीं थीं। हालांकि उनकी यह प्रेम कहानी मुकम्मल नहीं हो पाई। अपने अंतिम दिनों तक में भी सुरैया ने देव को याद रखा। सुरैया को लेकर देव का कहना था कि वह उनके लिए काफी सीरियस थे और सुरैया उनका पहला प्यार थीं, फैमिली इश्यूज़ की वजह से वे कभी एक न हो सके।
- देव आनंद एक्ट्रेस जीनत अमान के साथ भी रिलेशन में थे। उस दौरान उनकी यह प्रेम कहानी खूब चर्चा में रही थी। ऐसा माना जाता है कि एक्टर राज कपूर के लिए देव ने कभी जीनत से प्यार का इजहार नहीं किया।
- क्रिश्चिन परिवार से आतीं मोना सिंह का भी देव के साथ प्रेम-प्रसंग रहा। मोना ने शिमला से अपनी पढ़ाई पूरी की थी और वह देव के कहने पर मुंबई आई थीं।


