राजगढ़, 24 फरवरी I अगर आप दूध पी रहे हैं, तो जरा संभल के। ये दूध नकली और मिलावटी हुआ तो आपको कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी भी हो सकती है। राजगढ़ में नकली दूध बनाने की फैक्टरी पकड़ी गई है। यहां खतरनाक केमिकल से दूध बनाया जा रहा था। नकली दूध फैक्टरी का संचालक ग्रेजुएट है। उसने दूध बनाने का तरीका यूट्यूब से सीखा है। मुनाफा भी 200% से ज्यादा था। इस दूध को वह प्लांट में खपाता था।
राजगढ़ से 15 किलोमीटर दूर खैरासी गांव। आबादी एक हजार 476। यहां करीब हर दूसरे-तीसरे घर में मवेशी हैं। गांव में तीन दूध डेयरी हैं। इनमें से एक डेयरी हेमराज (23) कारपेंटर चलाता है। हेमराज बीएससी पास है। गांव के लोग मवेशियों का दूध निकालकर यहां बेचते हैं। आसपास के ग्रामीणों से दूध खरीदने के बाद उसे एकत्रित कर प्लांट भेजा जाता है। हेमराज ने करीब 6 महीने पहले दूध डेयरी शुरू की थी। वह जल्दी अमीर बनना चाहता था। दूध डेयरी में ज्यादा मुनाफा नहीं मिलता था। अक्सर फ्री रहने पर वह यूट्यूब पर पैसे कमाने का तरीका खोजता रहता था।
एक दिन उसने यूट्यूब पर पैसे कमाने के लिए नकली दूध बनाने वाला वीडियो देखा। उसके मन में नकली दूध बनाने का आइडिया जम गया। दूध डेयरी होने से उसे यह आसान भी लगा। वह बाजार से नकली दूध बनाने के लिए कुछ केमिकल लेकर आया। पहली बार नकली दूध बनाया। हालांकि, पहली बार में दूध अच्छा नहीं बना। वह धीरे-धीरे प्रैक्टिस करता रहा। कुछ दिन में नकली दूध को मार्केट में सप्लाई कर दिया। दूध लेने वाले असली-नकली की पहचान तक नहीं कर पाए। इससे हेमराज की झिझक खत्म हो गई।
फिर क्या था, मुनाफा बढ़ने लगा। एक लीटर दूध बनाने में 20 रुपए का खर्च आता। इस दूध को वह 55 रुपए प्रति लीटर में बेचता था। यानी 200 प्रतिशत से ज्यादा मुनाफा कमाता था। इसके बाद हेमराज दिन में आसपास के ग्रामीणों से डेयरी पर दूध खरीदता। रात में केमिकल से नकली दूध बनाकर उस असली दूध के साथ नकली दूध को मिक्स कर राजगढ़ जिले में सप्लाई कर देता था। नकली दूध बनाने की शुरुआत 5 लीटर से हुई, जो कुछ दिन में ही 30 लीटर तक पहुंच गई। छह महीने के भीतर यह आंकड़ा 300 लीटर तक पहुंचा गया।


