भारत ने आज से ठीक 15 साल पहले 24 सितंबर 2007 को चिरप्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को पटखनी देकर टी20 वर्ल्ड कप का पहला खिताब जीता था। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने इतिहास रचते हुए पांच रन से मुकाबला अपने नाम किया था। दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में खेले गए फाइनल में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 157 रन बनाए थे। पाकिस्तान को अंतिम ओवर में जीत के लिए 13 रन बनाने थे। पाकिस्तान के कप्तान (Misbah-ul-Haq) आखिरी विकेट के रूप में टीम की नैया पार लगाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
मिस्बाह ने जोगिंदर शर्मा की दूसरी गेंद पर छक्का लगाकर भारतीय खेमे में खलबली मचा दी थी। हालांकि जोगिंदर ने अगली ही गेंद पर मिस्बाह को लेग साइड में श्रीसंत के हाथों कैच कराकर भारत को वर्ल्ड चैंपियन बना दिया। मिस्बाह ने जो वो शाॅट खेला था उसका पछतावा उसे 15 साल बाद अब भी हो रहा है।
एएसपीएनक्रिकइंफो द्वारा ट्विटर पर शेयर एक वीडियो में मिस्बाह ने उस फाइनल मैच को याद करते हुए कहा, ” हम रमजान के महीने में लाहौर और कराची में काफी टी20 क्रिकेट खेला करते थे। इसलिए हम टी20 क्रिकेट खेलने के ज्यादा आदी थे। उस समय मेरी फॉर्म भी अच्छी थी और मुझे केवल गेंदबाज को देखना था। मुझे विश्वास था कि मैं उस लक्ष्य को हासिल कर लूंगा। उस ओवर में मुझे केवल दो हिट लगाने थे क्योंकि जीत के लिए केवल 13 रन चाहिए था।”
मिस्बाह ने उस फाइनल मुकाबले में 38 गेंदों पर चार चौकों की मदद से अपने टीम के लिए सबसे ज्यादा 43 रन बनाए थे। उनके अलावा यूनिस खान ने 24 और यासिर आराफात ने 15 रन का योगदान दिया था।मिस्बाह ने आगे कहा, ” हमारे पक्ष में केवल एक ही चीज नहीं थी और वो ये कि हमने 9 विकेट गंवा दिए थे। और मुझे पता था कि अब जो भी करना है, मुझे ही करना है। हो सकता है कि मैंने जो उस शॉट को खेलने का विकल्प चुना वो गलत था। नहीं तो अगर विकेट हाथ में होता तो मैं बड़े शॉट के लिए जाता।”


