- जगदलपुर और दंतेवाड़ा में 3,799 दिव्यांग हितग्राहियों को मिलेंगे कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण, आईईडी पीड़ितों के पुनर्वास पर विशेष जोर
रायपुर, 3 अक्टूबर 2026। बस्तर संभाग के दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर पुनर्वास अभियान शुरू किया जा रहा है। जगदलपुर और दंतेवाड़ा में आयोजित होने वाले इन वृहद दिव्यांग शिविरों में कुल 3,799 चिन्हित हितग्राहियों को लाभान्वित किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिविरों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध और प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल हिंसा और विशेष रूप से आईईडी विस्फोटों में अपने अंग गंवा चुके नागरिकों के पुनर्वास के लिए अभियान को मिशन के रूप में संचालित किया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि कोई भी पात्र दिव्यांगजन सरकारी सहायता से वंचित न रहे। इसके लिए ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के माध्यम से हितग्राहियों की अंतिम सूची तैयार करने तथा आईईडी विस्फोट से प्रभावित दिव्यांगजनों का अलग से विवरण रखने को कहा गया है।
शिविरों में कृत्रिम अंग, ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, कैलिपर्स और श्रवण यंत्र सहित विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। जिन हितग्राहियों के पास दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा शिविर स्थल पर ही प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जगदलपुर में पहला तीन दिवसीय शिविर 5 से 7 अक्टूबर तक क्रीड़ा परिसर में आयोजित होगा। 5 अक्टूबर को बस्तर, 6 अक्टूबर को नारायणपुर और कोंडागांव तथा 7 अक्टूबर को कांकेर जिले के चयनित हितग्राही शामिल होंगे। इस शिविर के लिए कुल 2,953 हितग्राहियों को चिन्हित किया गया है।
इसके बाद 15 से 17 अक्टूबर तक दंतेवाड़ा के पुलिस लाइन परिसर में शिविर लगेगा। इसमें दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के 846 हितग्राहियों को कृत्रिम अंग, कैलिपर्स और अन्य सहायक उपकरण प्रदान किए जाएंगे। दोनों शिविर प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शुरू होंगे।
कमिश्नर डोमन सिंह ने बैठक में शिविरों की प्रशासनिक कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि संबंधित जिला प्रशासन द्वारा हितग्राहियों के लिए निःशुल्क परिवहन और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। शिविर में आने वाले हितग्राहियों को पहचान के लिए आधार कार्ड जैसे पहचान प्रमाण की प्रति और दो पासपोर्ट आकार के फोटो साथ लाने होंगे।
जयपुर से पहुंचने वाली विशेषज्ञ तकनीकी टीम नए उपकरणों के वितरण के साथ पुराने कृत्रिम अंगों की मरम्मत भी करेगी। शिविर स्थलों पर छाया, पेयजल, शौचालय, बिजली, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। दिव्यांगजनों की सहायता के लिए स्काउट-गाइड के स्वयंसेवकों की तैनाती भी की जाएगी।
अधिकारियों को शिविरों के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए हैं, ताकि दूरस्थ और जरूरतमंद क्षेत्रों के दिव्यांगजनों तक इसकी जानकारी पहुंच सके। साथ ही ग्राम सभाओं के माध्यम से गांवों में सुरक्षा सत्यापन कर उन्हें आईईडी-मुक्त ग्राम घोषित करने की दिशा में भी कार्य करने पर जोर दिया गया।
बैठक में पुलिस महानिरीक्षक, संभाग के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत सीईओ, स्वास्थ्य एवं नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर आकाश छिकारा ने धरमपुरा में आयोजित होने वाले शिविर की तैयारियों की जानकारी दी। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।







