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1 अक्टूबर, अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस विशेष : जहां अपनों ने छोड़ा, वहां प्रशांति ने थामा हाथ, बुजुर्गों के लिए उम्मीद का घर बना प्रशांति वृद्धाश्रम

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कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। जिंदगी की सांझ में जब बुजुर्गों को सबसे ज्यादा जरूरत परिवार के साथ, स्नेह और सहारे की होती है, तब कुछ चेहरे ऐसे भी मिलते हैं जिनके जीवन से अपनों का साथ छूट चुका है। किसी ने जीवनसाथी खो दिया, किसी का परिवार बिखर गया और किसी को अपने ही घर में उपेक्षा का सामना करना पड़ा। कोरबा का प्रशांति वृद्धाश्रम ऐसे ही बुजुर्गों के लिए बीते 23 वर्षों से आश्रय, सम्मान और अपनत्व का ठिकाना बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर जब वृद्धाश्रम पहुंचकर यहां रह रहे बुजुर्गों से मुलाकात की गई, तो उनके चेहरों पर बीते जीवन की पीड़ा के साथ वर्तमान में मिले सहारे का संतोष भी नजर आया।

प्रशांति वृद्धाश्रम की शुरुआत के पीछे कोरबा के तत्कालीन प्रशासन की संवेदनशील पहल रही है। कोरबा के पहले कलेक्टर पीसी दलेई की पहल पर नगर पालिक निगम द्वारा वृद्धाश्रम भवन का निर्माण कराया गया। 19 सितंबर 1998 को तत्कालीन जांजगीर लोकसभा सांसद चरणदास महंत ने भवन का लोकार्पण किया। इसके बाद 23 अप्रैल 2003 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित समारोह के साथ वृद्धाश्रम का विधिवत संचालन शुरू हुआ। इसके लिए तत्कालीन कलेक्टर इशिता राय के प्रयास महत्वपूर्ण रहे। शुरुआत में प्रशांति वृद्धाश्रम को छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग की योजना में शामिल किया गया और संचालन की जिम्मेदारी रोटरी क्लब को दी गई। करीब दो वर्ष बाद रोटरी क्लब ने इसे जिला प्रशासन को सौंप दिया।

समय के साथ वृद्धाश्रम के संचालन की जिम्मेदारी नवदृष्टि समाजसेवी संस्था को मिली। 1 जुलाई 2005 को तत्कालीन कलेक्टर गौरव द्विवेदी ने संस्था को प्रशांति वृद्धाश्रम के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद से नवदृष्टि लगातार इसका संचालन कर रही है। संस्था ने यहां रहने वाले बुजुर्गों को केवल छत उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें परिवार जैसा वातावरण देने का प्रयास किया है।

वर्तमान में प्रशांति वृद्धाश्रम में 28 महिला एवं पुरुष वरिष्ठ नागरिक रह रहे हैं। यहां उन्हें भोजन, चिकित्सा सहित आवश्यक सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। यहां रहने वाले प्रत्येक बुजुर्ग की अपनी अलग कहानी है, लेकिन उनकी जिंदगी का एक साझा पक्ष है—किसी न किसी मोड़ पर उन्हें अकेलेपन का सामना करना पड़ा। वृद्धाश्रम में आने के बाद उन्हें कम से कम यह भरोसा मिला है कि जीवन की इस अवस्था में वे अकेले नहीं हैं।

प्रशांति वृद्धाश्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि इसके संचालन के लिए नवदृष्टि समाजसेवी संस्था को किसी सरकारी अथवा गैर सरकारी संस्था से नियमित अनुदान प्राप्त नहीं होता। संस्था अपने संसाधनों और समय-समय पर मिलने वाले जनसहयोग से वृद्धाश्रम की व्यवस्थाएं संचालित करती है। भोजन, चिकित्सा और रोजमर्रा की जरूरतों की पूर्ति इसी व्यवस्था के माध्यम से की जाती है।

अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस केवल बुजुर्गों को याद करने का दिन नहीं, बल्कि समाज को अपनी जिम्मेदारी याद दिलाने का अवसर भी है। प्रशांति वृद्धाश्रम की 23 वर्षों की यात्रा यही संदेश देती है कि परिवार से दूर हो चुके बुजुर्गों के लिए समाज का संवेदनशील रवैया उन्हें जीवन के अंतिम पड़ाव में सम्मान और सुरक्षा का एहसास दे सकता है। यहां की चारदीवारी के भीतर रहने वाले 28 बुजुर्गों के लिए प्रशांति केवल एक वृद्धाश्रम नहीं, बल्कि वह जगह है जहां उनकी मौजूदगी आज भी मायने रखती है।

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