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ऊर्जा बदलाव के दौर में SECL का बड़ा डायवर्सिफिकेशन प्लान, सौर ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स पर बढ़ेगा फोकस

कोरबा, 24 सितम्बर। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच कोल इंडिया की प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) अब अपने कारोबार का दायरा पारंपरिक कोयला खनन से आगे बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी ने गैर-पारंपरिक ऊर्जा, कोल गैसीफिकेशन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में योजनाओं पर काम तेज कर दिया है। इसके तहत चालू वित्त वर्ष में करीब 4,000 करोड़ रुपए का पूंजीगत निवेश प्रस्तावित है।

SECL की योजना अगले दो वर्षों में कुल 626 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने की है। इसके लिए बंद हो चुकी खदानों के क्षेत्रों तथा जलाशयों का उपयोग किए जाने की संभावना है। जलाशयों में फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। इस दिशा में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम (JV) की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। परियोजनाओं के आकार और स्वरूप को अंतिम रूप दिए जाने के बाद सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होने की उम्मीद है।

इसके साथ ही SECL कोयले के वैकल्पिक और अधिक मूल्यवर्धित उपयोग की दिशा में सरफेस कोल गैसीफिकेशन परियोजना पर भी काम कर रही है। प्रस्तावित मॉडल में राजस्व साझेदारी की व्यवस्था रखे जाने की बात सामने आई है। इससे निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी कोल गैसीफिकेशन से जुड़ी परियोजनाओं में भागीदारी का अवसर मिल सकेगा। गैसीफिकेशन के माध्यम से कोयले से बाजार की मांग के अनुरूप विभिन्न वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार करने की दिशा में कंपनी आगे बढ़ रही है।

SECL ने अपने खनन क्षेत्रों में मौजूद माइन डंप और ओवरबर्डन में महत्वपूर्ण खनिजों की संभावनाएं तलाशने की प्रक्रिया भी शुरू की है। कंपनी ने क्रिटिकल मिनरल्स, विशेष रूप से रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उपलब्धता का आकलन करने के लिए सात माइन डंप चिन्हित किए हैं। इनके सर्वे और अध्ययन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। इस कार्य में सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDI) तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है।

इसके अलावा कोल इंडिया द्वारा छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड सहित अन्य संस्थाओं के साथ सहयोग और समझौते किए गए हैं। SECL के मुताबिक ऊर्जा क्षेत्र में बदलती जरूरतों को देखते हुए कंपनी कोयला उत्पादन के साथ नए कारोबारी क्षेत्रों में संभावनाएं तलाश रही है।

SECL के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सनीष चंद्र ने कहा कि कंपनी का फोकस अब पारंपरिक कोयला उत्पादन के साथ सौर ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसी परियोजनाओं पर भी है। इन पहलों का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों और संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देना है।

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