मुरिया दरबार का जिक्र प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में हुआ, जानिए क्या है 150 साल पहले शुरू हुई इस परंपरा का इतिहास

01 November 2025, Naya Raipur: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा भवन के उद्घाटन के दौरान अपने भाषण में मुरिया दरबार का जिक्र किया। इस परंपरा की शुरुआत आज से 150 साल पहले हुई थी। आजादी से पहले रियासतकालीन बस्तर में दरबार लगता था, जिसमें आदिवासी समुदायों के मुखिया राजा के सामने अपनी समस्याएं रखते थे।

छत्तीसगढ़ में नए विधानसभा भवन के लोकार्पण अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बस्तर की वर्षों पुरानी मुरिया दरबार परंपरा का जिक्र किया। आजादी के पहले रियासतकाल में राजा और जनता के बीच प्रत्यक्ष संवाद और रियासत के विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति, सुख-दुख, मांगों और समस्याओं पर चर्चा दरबार में होती थी। आजादी के बाद दरबार में शासन-प्रशासन के प्रतिनिधि शामिल होते हैं और जनता की बातें सुनते हैं। राजा को बस्तर माटी पुजारी का दर्जा प्राप्त है और दशहरा उत्सव के आयोजन, रस्मों और पूजा विधान में उनकी प्रत्यक्ष और मुख्य सहभागिता होती है और वह भी दरबार में शामिल होते हैं।

बता दें कि पिछली बार चार अक्टूबर को आयोजित मुरिया दरबार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे।बस्तर दशहरा किताब के लेखक और बस्तर की संस्कृति के जानकार रूद्रनारायण पाणिग्राही ने मुरिया दरबार की विस्तार से चर्चा की है। मुरिया दरवार का सूत्रपात आठ मार्च 1876 को पहली बार हुआ था।

By- Garima Agrawal