देश में इलेक्ट्रिक कारों मांग तेजी से बढ़ रही है. लेकिन कुछ महीनों में कारों में खराबी के कई मामले सामने आए, जिसमें डीलर और ग्राहक के बीच विवाद की स्थिति बन गई है. लेकिन तेलंगाना में उपभोक्ता आयोग ने कार खराबी के एक मामले में ग्राहक के हक में फैसला सुनाया है. आयोग ने डीलर को कार की पूरी रकम वापस करने का आदेश दिया है.
दरअसल, तेलंगाना में टाटा मोटर्स की इलेक्ट्रिक SUV Harrier EV खरीदने के बाद एक ग्राहक को बार-बार परेशानी का सामना करना पड़ा. कार में स्मार्ट-Key और सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम से जुड़ी खराबी बार-बार सामने आई. हालात इतने खराब हो गए कि ग्राहक को कई बार सड़क पर ही कार के साथ फंसना पड़ा. इसके बाद तेलंगाना की उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में डीलर को ग्राहक को करीब ₹24 लाख वापस करने और ₹65,000 अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया है.
कुछ ही दिनों में हुई ये समस्या
दी इकोनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक, यह मामला अगस्त 2025 में Harrier EV खरीदने से जुड़ा है. ग्राहक ने 26 लाख रुपये से ज्यादा कीमत की इलेक्ट्रिक SUV खरीदने के लिए लोन लिया था. कार की डिलीवरी मिलने के कुछ ही हफ्तों बाद इसमें समस्याएं शुरू हो गईं. स्मार्ट- Key नॉर्मल दूरी से काम करना बंद कर देती थी. इसके अलावा सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम भी कभी कार को लॉक नहीं करता था और कभी लॉक होने के बाद उसे खोलने में परेशानी होती थी.
इन खराबियों के कारण ग्राहक कई बार सड़क पर फंस गया. उसे कार को टो करवाना पड़ा या मौके पर मदद लेनी पड़ी. समस्या ठीक कराने के लिए ग्राहक बार-बार सर्विस सेंटर पहुंचा, लेकिन मरम्मत के बाद कुछ समय में वही खराबी दोबारा सामने आ जाती थी. ग्राहक ने अपनी शिकायत में डीलर के साथ हुई बातचीत के चैट रिकॉर्ड, ईमेल और कॉल लॉग भी आयोग के सामने रखे. इन दस्तावेजों से पता चला कि कई महीनों तक स्मार्ट-Key और लॉकिंग सिस्टम की समस्या की शिकायत लगातार की गई थी.
दिसंबर 2025 के सर्विस जॉब कार्ड भी मामले में अहम सबूत बने. इनमें स्मार्ट-Key और लॉकिंग से जुड़ी समस्या का जिक्र किया गया था. आयोग ने माना कि अगर एक ही समस्या बार-बार सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज हो रही है, तो यह साबित करता है कि खराबी स्थायी रूप से ठीक नहीं हुई थी. एक मौके पर कार सड़क के बीच में चलना भी बंद हो गई थी.
डीलर की दलील नहीं मानी गई
डीलर ने आयोग में कहा कि वह सिर्फ कार बेचने और उसकी सर्विस के लिए जिम्मेदार है. अगर कार में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट है तो इसकी जिम्मेदारी निर्माता की होनी चाहिए. डीलर ने यह भी कहा कि ग्राहक ने किसी विशेषज्ञ की रिपोर्ट नहीं दी है, जिससे यह साबित हो कि खराबी मैन्युफैक्चरिंग के दौरान हुई थी. हालांकि, आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. आयोग ने कहा कि डीलर ने ऐसा कोई दस्तावेज नहीं दिया, जिससे यह साबित हो कि निर्माता और डीलर के बीच जिम्मेदारी की व्यवस्था क्या थी. वहीं, डीलर के अपने सर्विस रिकॉर्ड में लगातार एक जैसी खराबी दर्ज थी.
आयोग ने यह भी कहा कि इस मामले में अलग से विशेषज्ञ की रिपोर्ट जरूरी नहीं थी. सर्विस सेंटर के जॉब कार्ड और बार-बार की गई शिकायतें ही यह दिखाने के लिए पर्याप्त थीं कि समस्या ठीक नहीं हुई थी.
10% डेप्रिसिएशन काटकर मिलेगा पैसा
आयोग ने डीलर को कार की कीमत में से 10% डेप्रिसिएशन काटकर बाकी रकम ग्राहक को वापस करने का आदेश दिया. यह रकम करीब ₹24 लाख बैठती है. इसके अलावा ग्राहक को मानसिक परेशानी और आर्थिक नुकसान के लिए ₹50,000 मुआवजा और मामले की लागत के तौर पर ₹15,000 देने का आदेश दिया गया है. यानी एक्स्ट्रा भुगतान कुल ₹65,000 होगा. डीलर को आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है. अगर इस अवधि के बाद भुगतान किया जाता है तो देरी की अवधि के लिए 9% सालाना ब्याज देना होगा.
इसके बदले ग्राहक को Harrier EV डीलर को वापस करनी होगी और रजिस्ट्रेशन रद्द कराने से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया में सहयोग करना होगा. हालांकि, कार खरीदते समय अलग से दिए गए CGST, SGST और अन्य सरकारी शुल्क का रिफंड आयोग ने नहीं दिया.







