सारंगढ़, 05 अक्टूबर। नगर के हृदय स्थल नंदा चौक में पिछले कई सप्ताह से बीमार हालत में पड़ी गौ माता की आखिरकार 4 अक्टूबर को मौत हो गई। लंबे समय से बीमार गौ माता के उपचार और सेवा के लिए स्थानीय गौ सेवकों, समाजसेवियों और युवाओं ने अपने स्तर पर लगातार प्रयास किए, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। गौ माता की मौत के बाद नंदा चौक परिसर में आने-जाने वाले लोगों में भी दुख और नाराजगी का माहौल देखने को मिला।
जानकारी के अनुसार, नंदा चौक में कई सप्ताह से बीमार पड़ी गौ माता की स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी। इसकी जानकारी मिलने के बाद सारंगढ़ के गौ सेवकों की टीम ने उसकी देखभाल शुरू की। युवा गौ सेवक अमन यादव ने बीमार गौ माता के लिए दवाई, भोजन, पानी और अन्य जरूरी सेवा उपलब्ध कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। क्षेत्र के जाने-माने समाजसेवी सतीश यादव बल्ला ने भी गौ माता की सेवा और उपचार के लिए अपने स्तर पर सहयोग किया।
वहीं युवा समाजसेवी एवं अधिवक्ता अनुरोध पटेल ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सोशल मीडिया और समाचार पत्रों के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में हाल ही में शुरू हुई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से भी नंदा चौक में बीमार पड़ी गौ माता के उपचार और उचित देखभाल की मांग की थी। इसके बावजूद समय पर समुचित उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी और आखिरकार गौ माता ने दम तोड़ दिया।
गौ माता की मौत के बाद अधिवक्ता अनुरोध पटेल ने दुख जताते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते बीमार पशु को चिकित्सा सुविधा और अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था उपलब्ध होती तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने कहा कि सारंगढ़ में जिला पशु चिकित्सालय होने के बावजूद बीमार और घायल पशुओं को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त एम्बुलेंस सुविधा नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है।
अनुरोध पटेल ने सारंगढ़ क्षेत्र की गौशालाओं की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा गौ सेवा और संरक्षण के लिए गौशालाओं को प्रतिवर्ष लाखों रुपये का अनुदान दिया जाता है। इसके बावजूद नंदा चौक में कई सप्ताह तक बीमार पड़ी गौ माता को उचित उपचार और संरक्षण नहीं मिल सका। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि क्षेत्र के कई प्रभावशाली लोग नंदा चौक पहुंचे, लेकिन बीमार गौ माता के उपचार के लिए ठोस पहल नहीं की गई।
गौ सेवकों ने अब मृत गौ माता के अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी है। घटना ने सारंगढ़ में पशु चिकित्सा व्यवस्था, गौ संरक्षण और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।







