Home / Chhattisgarh / दो साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष का वनांचल क्षेत्र, मोबाइल टावर और पेयजल के लिए तरस रहे ग्रामीण

दो साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष का वनांचल क्षेत्र, मोबाइल टावर और पेयजल के लिए तरस रहे ग्रामीण

ख़बर शेयर करें:

राजेश यादव,सारंगढ़,20 अक्टूबर 2026। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के गठन के बाद क्षेत्रवासियों को बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और विकास की उम्मीद जगी थी, लेकिन जिले के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है। जिला पंचायत के पहले अध्यक्ष संजय भूषण पाण्डेय के दो वर्ष के कार्यकाल के बाद भी उनके निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 09 के वनांचल गांवों में विकास की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सारंगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत खोखसीपाली के आश्रित ग्राम सुवरगुड़ा में मोबाइल नेटवर्क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की समस्या ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासन के दौरान सारंगढ़-बिलाईगढ़ को नए जिले के रूप में स्थापित किया गया था। इसके बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी और जिले में हुए पहले जिला पंचायत चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को बहुमत मिला। जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 09 से सदस्य निर्वाचित होने के बाद संजय भूषण पाण्डेय जिला पंचायत अध्यक्ष बने। ऐसे में उनके निर्वाचन क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर अपेक्षाएं बढ़ी थीं। हालांकि, क्षेत्र के कुछ गांवों में सामने आ रही समस्याएं इन अपेक्षाओं पर सवाल खड़े कर रही हैं।

जंगलों से घिरा सुवरगुड़ा गांव आज भी मोबाइल टावर की सुविधा से वंचित बताया जा रहा है। मोबाइल नेटवर्क की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से ग्रामीणों को रोजमर्रा के संचार में परेशानी का सामना करना पड़ता है। आधुनिक तकनीक के इस दौर में मोबाइल फोन और इंटरनेट सेवाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी योजनाओं की जानकारी तथा आपातकालीन संपर्क के लिए महत्वपूर्ण हो गई हैं। ऐसे में नेटवर्क की समस्या ग्रामीणों को अन्य क्षेत्रों की तुलना में पीछे रखने वाली स्थिति पैदा करती है।

ग्रामीणों के सामने पेयजल की समस्या भी गंभीर चुनौती बनी हुई है। गर्मी की शुरुआत में ही पीने के पानी की उपलब्धता को लेकर परेशानी सामने आने से आने वाले दिनों में स्थिति को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल, संचार सुविधा और अन्य बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराना विकास की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। इसके बावजूद सुवरगुड़ा जैसे वनांचल गांव में इन सुविधाओं का अभाव स्थानीय विकास व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल उठाता है।

जिला पंचायत अध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों के वितरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र के कुछ गांवों में लाखों रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति विभिन्न मदों से मिलने की जानकारी सामने आती है, जबकि दूसरी ओर कुछ गांवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विकास कार्यों का लाभ क्षेत्र के सभी गांवों तक समान रूप से पहुंच रहा है या नहीं। विकास योजनाओं की स्वीकृति के साथ उनका वास्तविक क्रियान्वयन और ग्रामीणों को मिलने वाली सुविधाओं का आकलन भी जरूरी है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के गठन का उद्देश्य प्रशासन को ग्रामीणों के करीब लाना और विकास की गति तेज करना था। ऐसे में जिला पंचायत के दो वर्ष के कार्यकाल के बाद भी यदि वनांचल गांवों में मोबाइल टावर और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाओं की कमी बनी हुई है, तो संबंधित जनप्रतिनिधियों और विभागों को इस दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए। सुवरगुड़ा सहित क्षेत्र के अन्य गांवों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना ही विकास कार्यों की वास्तविक सफलता का पैमाना होगा। अब ग्रामीणों की अपेक्षा है कि उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।

ख़बर शेयर करें:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *