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दिव्यांगता बाधा नहीं, स्वरोजगार से देवेंद्र ने संवारी जिंदगी…

दिव्यांगजन स्वरोजगार ऋण योजना से मिला 1.80 लाख रुपए का ऋण, किराना दुकान शुरू कर बने आत्मनिर्भर

दुर्ग ,18 सितंबर। दिव्यांगता के बावजूद आत्मनिर्भर बनने की इच्छा-शक्ति और शासन की स्वरोजगार योजनाओं ने देवेंद्र कुमार यादव के जीवन को नई दिशा दी है। कैलाशबाड़ी दुर्ग निवासी देवेंद्र कुमार यादव ने दिव्यांगजन स्वरोजगार ऋण योजना का लाभ लेकर किराना दुकान शुरू की और अब अपने परिवार का बेहतर ढंग से भरण-पोषण कर रहे हैं।

देवेंद्र कुमार यादव ने कक्षा 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की है। वे 60 प्रतिशत अस्थि बाधित दिव्यांगता से प्रभावित हैं। दिव्यांगता के कारण जीवन में कई चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया। स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की उनकी इच्छा को शासन की योजना से नई राह मिली।

जिला कार्यालय समाज कल्याण एवं समाज कल्याण विभाग के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम की दिव्यांगजन स्वरोजगार ऋण योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत उन्हें 1.80 लाख रूपए का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि से उन्होंने किराना दुकान व्यवसाय शुरू किया।

किराना दुकान शुरू होने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। व्यवसाय से होने वाली आय से वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं तथा ऋण की मासिक किस्तों का भी नियमित रूप से भुगतान कर रहे हैं। समय पर ऋण की अदायगी कर वे आत्मनिर्भरता की ओर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। देवेंद्र कुमार यादव कहते है कि दिव्यांगता जीवन में चुनौती जरूर है, लेकिन हौसले और सही अवसर के साथ आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने अन्य दिव्यांगजनों से भी अपील की कि वे दिव्यांगता से हतोत्साहित न हों और शासन की स्वरोजगार योजनाओं का लाभ लेकर अपने भविष्य को संवारें।

शासन की योजना से मिला आर्थिक संबल देवेंद्र के लिए केवल ऋण नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर साबित हुआ है।

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