रायपुर/सिंगापुर। छत्तीसगढ़ के समृद्ध वन, वन्यजीव और जैव-विविधता को वैश्विक पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिंगापुर स्थित Mandai Wildlife Reserve का दौरा कर वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवास प्रबंधन, पर्यटक सुविधाओं और इको-टूरिज्म से जुड़ी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर के सफल अनुभवों से सीख लेकर छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप इको-टूरिज्म का प्रभावी मॉडल विकसित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ Mandai Wildlife Reserve का दौरा किया। साय भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के नामांकन पर सिंगापुर में आयोजित प्रथम Singapore-India Network for Growth (SING) Forum 2026 में शामिल होने पहुंचे हैं। दौरे के दौरान उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटकों को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने के लिए विकसित की गई व्यवस्थाओं का अध्ययन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसके विशाल वन क्षेत्र और समृद्ध जैव-विविधता से है। राज्य की करीब 44 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र में आती है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक फैले घने जंगल, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और प्राकृतिक स्थल छत्तीसगढ़ को इको-टूरिज्म के क्षेत्र में देश के प्रमुख राज्यों में शामिल करने की क्षमता रखते हैं। सरकार का प्रयास है कि इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए पर्यटन की संभावनाओं को विकसित किया जाए।
Mandai Wildlife Reserve में मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीव संरक्षण, पर्यटकों के लिए विकसित सुविधाओं, प्रबंधन व्यवस्था, जागरूकता गतिविधियों और प्रकृति आधारित पर्यटन के विभिन्न पहलुओं को समझा। उन्होंने कहा कि सिंगापुर की व्यवस्थाओं को छत्तीसगढ़ में हूबहू लागू करने के बजाय वहां के सफल अनुभवों को राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और जैव-विविधता के अनुरूप अपनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में इको-टूरिज्म के विकास का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़ना भी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। स्थानीय युवाओं को गाइड, हॉस्पिटैलिटी, परिवहन और अन्य पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।
बस्तर का कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, इंद्रावती क्षेत्र, अचानकमार, उदंती-सीतानदी सहित प्रदेश के कई प्राकृतिक स्थल इको-टूरिज्म की व्यापक संभावनाएं रखते हैं। संरक्षण, स्थानीय भागीदारी और आधुनिक पर्यटक सुविधाओं के बेहतर समन्वय से इन क्षेत्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है। सिंगापुर के Mandai Wildlife Reserve का अनुभव छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति आधारित पर्यटन को नई दिशा देने में उपयोगी साबित हो सकता है।







