कोरबा। कोयला खनन क्षेत्र में वर्ष 2020 से निजी कंपनियों के प्रवेश के बाद अब कोल इंडिया की सहयोगी कंपनियां भी कमर्शियल माइनिंग के लिए कोल ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा ले रही हैं। कोरबा जिले के कोल ब्लॉक आवंटन में निजी कंपनियों के साथ कोल इंडिया की सहयोगी कंपनियों पर भी समान शर्तें लागू हैं। इसी क्रम में कोल इंडिया की वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) ने कमर्शियल माइनिंग के तहत कोल ब्लॉक हासिल करने के लिए नीलामी प्रक्रिया में भाग लिया है।
कमर्शियल माइनिंग व्यवस्था लागू होने से पहले बिजली, सीमेंट, स्टील और एल्युमिनियम जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली निजी कंपनियां मुख्य रूप से अपने कैप्टिव उपयोग के लिए आवंटित कोल ब्लॉक से कोयला निकाल सकती थीं। अन्य उपयोग के लिए उन्हें कोल इंडिया की कंपनियों से कोयला खरीदना पड़ता था। वर्ष 2020 में कमर्शियल कोल माइनिंग शुरू होने के बाद निजी कंपनियों को आवंटित कोल ब्लॉक से कोयला निकालने के साथ उसकी बिक्री का भी अधिकार मिला।
हाल ही में कमर्शियल कोल माइनिंग के 16वें दौर की नीलामी के लिए 25 कोल खदानों की सूची जारी की गई है। इनमें छत्तीसगढ़ की पांच खदानें शामिल हैं। कोरबा जिले में करीब एक वर्ष पहले चिन्हित विजय सेंट्रल कोल ब्लॉक का आवंटन रूंगटा संस प्राइवेट लिमिटेड को किया जा चुका है। यह कोल ब्लॉक कमर्शियल माइनिंग के तहत संचालित किया जाएगा।
कोरबा जिले के पांच अन्य कोल ब्लॉक भी नीलामी के लिए सूचीबद्ध किए गए हैं। इनमें करतला विकासखंड के करतला साउथ, कलगामार और मदवानी तथा कोरबा क्षेत्र के बताती, कोलगा वेस्ट और तौलीपाली कोल ब्लॉक शामिल हैं। नीलामी प्रक्रिया में सफल बोलीदाता को कंपोजिट लाइसेंस मिलने के बाद संबंधित क्षेत्र में सर्वेक्षण और खनन गतिविधियां संचालित करने का अधिकार मिलेगा।
इस बीच एसईसीएल ने फिलहाल कमर्शियल माइनिंग के लिए कोल ब्लॉक की नीलामी में रुचि नहीं दिखाई है। एसईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सनीष चंद्र ने बताया कि एसईसीएल की खुली खदानों में पर्याप्त कोयला भंडार उपलब्ध है। यही वजह है कि कंपनी ने अब तक कोल ब्लॉक की नीलामी में हिस्सा लेने में रुचि नहीं दिखाई है। हालांकि, कोल इंडिया की अन्य सहयोगी कंपनियों ने कमर्शियल माइनिंग के लिए कोल ब्लॉक हासिल करने की नीलामी प्रक्रिया में भाग लिया है।







