कोरबा। शहर के बीच से गुजरने वाली बांयीं तट नहर की बदहाल स्थिति को सुधारने की कवायद एक बार फिर नए सिरे से शुरू की जा रही है। करीब 7.49 करोड़ रुपए के प्रस्तावित कार्य का टेंडर चार बार जारी होने के बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। बार-बार टेंडर निरस्त होने के बाद अब सिंचाई विभाग ने काम को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर कराने का निर्णय लिया है। नहर की क्षतिग्रस्त लाइनिंग की मरम्मत के साथ चुनिंदा स्थानों पर आईसीसी पैनल तैयार किया जाएगा। दोनों कार्यों के लिए अलग-अलग निविदा जारी करने की तैयारी है।
दर्री बराज से निकलने वाली यह नहर शहर के घनी आबादी वाले हिस्से से होकर गुजरती है। कई स्थानों पर नहर के ऊपर सड़क का निर्माण होने के कारण लाइनिंग की खराबी का असर सीधे सड़क की मजबूती पर पड़ रहा है। संजय नगर रेलवे क्रॉसिंग के पास सड़क की सुरक्षा के लिए बनाई गई सेफ्टीवॉल भी मिट्टी के कटाव से प्रभावित हुई है। लगातार पानी के बहाव और बारिश के कारण करीब 10 मीटर लंबा हिस्सा ढह चुका है। नहर किनारे लगाए गए स्ट्रीट लाइट के खंभे भी कई जगह झुकने लगे हैं। फिलहाल खतरे वाले स्थानों पर विभाग ने बोरियां लगाकर अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था की है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार टेंडर प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा नहीं मिलने के कारण मरम्मत का काम अटकता रहा। चार अवसरों पर निविदा आमंत्रित की गई, लेकिन या तो ठेकेदार सामने नहीं आए या फिर एक ही निविदा प्राप्त हुई। इसके चलते टेंडर को निरस्त करना पड़ा। अब विभाग काम की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग पैकेज तैयार कर रहा है।
नहर के सुनालिया पुल से इमलीडुग्गू तक का हिस्सा सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त बताया जा रहा है। इसी क्षेत्र में लाइनिंग सुधारने के साथ पुलों के आसपास आईसीसी पैनल लगाने की योजना है। प्रस्ताव के तहत लाइनिंग के लिए लगभग 5 करोड़ और आईसीसी पैनल के लिए करीब 3 करोड़ रुपए की निविदा प्रस्तावित है।
बांयीं तट नहर की मरम्मत के लिए पहले से स्वीकृत कार्यों में दो चरणों का ठेका किया जा चुका है। दोनों चरणों में लगभग 6-6 करोड़ रुपए के कार्य शामिल हैं। संबंधित ठेका एजेंसी को वर्क ऑर्डर भी जारी किया जा चुका है। अब शेष महत्वपूर्ण हिस्से की मरम्मत के लिए नए सिरे से प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
हसदेव दर्री बैराज के कार्यपालन अभियंता एसएन साय के अनुसार नहर में सिंचाई के लिए पानी बंद होने के बाद मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा। बीच के हिस्से को दो भागों में बांटकर निविदा की जाएगी। विभाग का प्रयास है कि पानी बंद रहने की अवधि का उपयोग करते हुए गर्मी के मौसम में काम पूरा कराया जाए।
गौरतलब है कि दांयीं और बांयीं तट नहरों की मरम्मत के लिए करीब दो वर्ष पहले 88 करोड़ रुपए की लागत से 35 कार्य स्वीकृत किए गए थे। इनमें से कई कार्य अब तक निविदा प्रक्रिया में ही अटके हैं। सिंचाई के दौरान नहर में पानी छोड़े जाने से मरम्मत के लिए सीमित समय मिलता है। यही वजह है कि कई कार्यों के लिए ठेकेदार भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। कोरबा जिले के हिस्से में करीब 19 करोड़ रुपए के तीन प्रमुख कार्य शामिल हैं।
नहर के किनारे बनी सेफ्टीवॉल की संरचना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई स्थानों पर दीवार के नीचे पर्याप्त नींव और सपोर्टिंग कॉलम नहीं होने से लाइनिंग टूटने के बाद मिट्टी खिसकने का असर सीधे दीवार पर पड़ रहा है। अब विभाग नए प्रस्ताव को स्वीकृति दिलाकर दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।







