पिछले 99 वर्षों से होने वाली सदर बाजार रामलीला का आयोजन किया जाता है . इस रामलीला के अंतिम दिन यहां जो रावण का पुतला जलाया जाता है उसे बनाने का काम राबिया बानो करती हैं.उन्होंने बताया कि सुबह अजान की आवाज सुनने के बाद फज्र की नमाज़ अदा करती है उसके बाद वह अपना काम शुरु करती हैं.
झांसी. भारत उत्सवों का देश है. यहां मनाए जाने वाले पर्व और उत्सव धार्मिक आस्था को बनाए रखने के साथ ही लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराता है. इसके साथ ही धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देने का काम भी ये पर्व करते हैं. ऐसा ही एक उदहारण झांसी में देखने को मिला. जहां पिछले 99 वर्षों से होने वाली सदर बाजार रामलीला का आयोजन किया जाता है . इस रामलीला के अंतिम दिन यहां जो रावण का पुतला जलाया जाता है उसे बनाने का काम राबिया बानो करती हैं.
जालौन की रहने वाली राबिया बानो पिछले 30 वर्षों से यहां पुतला बनाने का काम करती हैं. वह खास तौर पर एक महीने के लिए झांसी आती हैं. अपने पुरे परिवार के साथ वह यहां आती हैं और पुतले बनाने का काम करती हैं. राबिया ने लोकल 18 से खास बातचीत में बताया कि उनसे पहले उनके पति यहां पुतले बनाने का काम करते थे. अधिक काम मिलने पर वह औरैया चले गए. इसके बाद उन्होंने यहां पुतले बनाने का काम शुरू कर दिया. अब उनके बच्चे भी इस काम में साथ देते हैं. उन्होंने बताया कि सुबह अजान की आवाज सुनने के बाद फज्र की नमाज़ अदा करती है उसके बाद वह अपना काम शुरु करती हैं.
बेटी भी देती है साथ, बनना चाहती है कला शिक्षक
राबिया बानो की बेटी आरजू भी उनके साथ पुतला बनाने में मदद करते हैं. नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली आरजू कहती हैं कि उन्होंने अपने माता-पिता को देखकर यह काम करना शुरू किया. वह पढ़ाई के साथ यह काम करती हैं. बड़े होकर वह कला की शिक्षक बनना चाहती हैं. वह अन्य युवाओं को भी यह गुर सिखाना चाहती हैं. रामलीला कमेटी के सदस्य ने बताया कि यह कमेटी 99 वर्षों से हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक है.


