दो दशक से फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर महुआपानी के ग्रामीण

दांत और हड्डियों की बीमारियों से बढ़ी परेशानी, शुद्ध पेयजल की मांग तेज

कोरबा। जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम महुआपानी में ग्रामीण पिछले करीब दो दशकों से फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। स्थिति यह है कि गांव की जल समस्या अब केवल पेयजल उपलब्धता तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। दूषित पानी के लगातार उपयोग से गांव में दांत और हड्डियों से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से इस समस्या की जानकारी प्रशासन और संबंधित विभागों को दी जा रही है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में उपलब्ध भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। इसी पानी का उपयोग पीने और घरेलू कार्यों में किया जा रहा है। इसके कारण बच्चों के दांत पीले पड़ने लगे हैं, जबकि युवाओं और बुजुर्गों में हड्डियों में दर्द, कमजोरी और जोड़ों की समस्या आम हो गई है। कई लोगों को चलने-फिरने में तकलीफ हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि दूषित जल के कारण धीरे-धीरे पूरा गांव स्वास्थ्य संकट की चपेट में आता जा रहा है।

ग्राम निवासी रामलाल कंवर ने बताया कि गांव में कई वर्षों से यही समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक किसी प्रकार की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने कहा कि “हम लोग मजबूरी में यही पानी पी रहे हैं। गांव के कई लोगों के दांत खराब हो चुके हैं और बुजुर्गों को हड्डियों में लगातार दर्द रहता है।” वहीं ग्रामीण महिला फूलबाई ने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि “छोटे बच्चों के दांत कम उम्र में ही पीले पड़ने लगे हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी केवल आश्वासन ही मिला है।”

ग्रामीण युवक मोतीलाल यादव ने बताया कि कुछ वर्ष पहले गांव में फ्लोराइड फिल्टर प्लांट लगाया गया था, जिससे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन रखरखाव के अभाव में वह बंद हो गया। उन्होंने कहा कि “फिल्टर प्लांट बंद होने के बाद फिर से लोग हैंडपंप और बोर के उसी पानी पर निर्भर हो गए हैं।”

महुआपानी के लोगों का कहना है कि गांव में नियमित स्वास्थ्य जांच भी नहीं हो रही है। कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं, जिसके कारण वे निजी अस्पतालों में इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने, शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने और बंद पड़े फिल्टर प्लांट को फिर से शुरू करने की मांग की है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. एस.एन. केशरी ने बताया कि इस वर्ष कोरबा जिले के पांचों विकासखंडों के कुल 59 गांव फ्लोराइड प्रभावित घोषित किए गए हैं। इन गांवों में दांत और हड्डियों से संबंधित बीमारियों से पीड़ित 237 मरीजों की पहचान की गई है, जिनका उपचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “जहां से भी फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्र की सूचना मिलती है, वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जाती है और शिविर लगाकर लोगों की जांच एवं उपचार किया जाता है।”

हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब समस्या वर्षों पुरानी है, तो अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जा सका। महुआपानी जैसे कई गांव आज भी शुद्ध पेयजल की मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। सरकारी आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर ग्रामीणों की पीड़ा को साफ उजागर कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। फिलहाल महुआपानी के लोग आज भी मजबूरी में वही पानी पी रहे हैं, जो धीरे-धीरे उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है।