नई दिल्ली। ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की व्यवस्था से जुड़े नियम 15 अक्टूबर से लागू होने की जानकारी सामने आई है। इसके तहत किसी भी एक लेन-देन पर लिया जाने वाला शुल्क ₹300 से अधिक नहीं होगा। हालांकि, इस शुल्क का असर मुख्य रूप से व्यापारिक लेन-देन पर पड़ने की बात कही गई है, जबकि आम उपभोक्ताओं के लिए किए जाने वाले व्यक्तिगत UPI भुगतान को लेकर अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को पारंपरिक डेबिट और क्रेडिट कार्ड की तुलना में कम रखा गया है। मानक क्रेडिट कार्ड भुगतान पर MDR आमतौर पर 1.5 से 2.5 प्रतिशत तक और डेबिट कार्ड पर करीब 0.90 प्रतिशत तक हो सकता है। इसके मुकाबले UPI के लिए 0.4 प्रतिशत का बेसलाइन MDR प्रस्तावित बताया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेन-देन रखी गई है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों की भुगतान प्रसंस्करण लागत को नियंत्रित रखना बताया जा रहा है। UPI के जरिए होने वाले बड़े मूल्य के लेन-देन में शुल्क की अधिकतम सीमा तय होने से व्यापारियों पर शुल्क का बोझ सीमित रहने की उम्मीद है।
हालांकि, UPI शुल्क को लेकर किसी भी बदलाव को समझने के लिए यह देखना जरूरी होगा कि संबंधित नियम किन प्रकार के लेन-देन और किन श्रेणी के व्यापारियों पर लागू होते हैं। उपभोक्ताओं को भी भुगतान करने से पहले अपने बैंक या संबंधित UPI सेवा प्रदाता की ओर से जारी ताजा जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।






