रायगढ़, 23 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धनागर क्षेत्र में दुर्लभ प्रजाति का रेड सैंड बोआ सांप मिलने से लोगों में कौतूहल का माहौल बन गया। सांप दिखाई देने की सूचना मिलते ही सर्प रक्षक समिति और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने सावधानीपूर्वक सांप का सुरक्षित रेस्क्यू किया। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद वन विभाग की मौजूदगी में उसे प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया गया।
सर्प रक्षक समिति के अनुसार, रायगढ़ क्षेत्र में रेड सैंड बोआ सांप करीब 10 साल बाद दिखाई दिया है। लंबे समय बाद इस प्रजाति का सांप मिलने को वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, क्षेत्र में 10 साल बाद इस सांप के दिखाई देने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रेड सैंड बोआ एक विषहीन सांप है, जिसे लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां प्रचलित हैं। इसकी अनोखी शारीरिक बनावट और विशेषताओं के कारण लोग इसे देखकर हैरान रह जाते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यह सांप आमतौर पर इंसानों के लिए खतरनाक नहीं होता और पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रेड सैंड बोआ सांप की अवैध खरीद-बिक्री और तस्करी के मामले भी सामने आते रहे हैं। अंधविश्वास और गलत धारणाओं के कारण इस प्रजाति के सांपों की अवैध मांग बनी रहती है। वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत इस सांप का अवैध शिकार, व्यापार और तस्करी दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
वन्यजीवों के जानकारों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी दुर्लभ प्रजाति का सांप दिखाई देने पर उसे नुकसान न पहुंचाएं और न ही स्वयं पकड़ने का प्रयास करें। इसकी सूचना तत्काल वन विभाग या प्रशिक्षित सर्प रक्षकों को दें। धनागर में मिले रेड सैंड बोआ सांप को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिए जाने से उसका संरक्षण सुनिश्चित किया गया है।







