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परिवहन नियमों की अनदेखी करने के मामले में 170 बसों का परिवहन विभाग ने परमिट निरस्त कर दिया

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रायपुर, 23 अक्टूबर। यात्रियों की सुरक्षा में लापरवाही तथा परिवहन नियमों की अनदेखी करने के मामले में 170 बसों का परिवहन विभाग ने परमिट निरस्त कर दिया है। आरोप है कि बस ऑपरेटरों ने अपनी बसों में पैनिक बटन नहीं लगाए थे, इसलिए उन बसों का परमिट निरस्त किया गया है। इसकी पुष्टि अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने की है। साथ ही इन सभी को ब्लैकलिस्टेड भी कर दिया गया है। अब ये बसें देशभर और प्रदेश की किसी भी सड़क पर नहीं दौड़ पाएंगी। बस संचालकों द्वारा बगैर जीपीएस और पैनिक बटन के बसों को चलाने की जानकारी मिलने पर परिवहन विभाग द्वारा 3 महीने विशेष अभियान चलाया गया।

बस संचालन होने पर करेंगे जब्त जिन बसों का परमिट निरस्त किया गया है, उन बसों के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इन बसों को संचालित करते पाए जाने पर उन्हें जब्त कर कार्रवाई की जाएगी और बस मालिक पर 10 हजार रुपए जुर्माना तथा 6 महीने की सजा का प्रावधान है।

वीएलटीडी जरूरी

बसों में अनिवार्य रूप से वीएलटीडी, पैनिक बटन लगाने का प्रमुख कारण यह भी है कि बस परमिट के हिसाब से अपनी टाइमिंग में तय रूट पर चल रही है कि नहीं, इसका लाइव लोकेशन परिवहन विभाग के अधिकारियों को मिलता रहता है। कई बस ऑपरेटर परमिट शर्तों का उल्लंघन करने अपनी बसों में वीएलटीडी को बंद कर देते हैं।

एक नजर आंकड़ों पर

राज्य में कुल बसों की संख्या- 12000

यात्री बसों की संख्या-4500

स्कूल बसों की संख्या- 6500

कार ऑल इंडिया टूरिस्ट, प्राइवेट बसों की संख्या- 1000

सुरक्षा के साथ खिलवाड़

वीएलटीडी सिर्फ एक डिवाइस नहीं, यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी है। पिछले साल कवर्धा में एक बस हादसे में जीपीएस नहीं होने से 3 घंटे तक पता ही नहीं चला कि बस कहां है। बस में वीएलटीडी होने पर 5 मिनट में लोकेशन मिल जाता। वहीं महिला सुरक्षा के लिए पैनिक बटन सबसे जरूरी है। बटन दबाते ही 112 पर कॉल चला जाता है और नजदीकी थाने व आरटीओ कंट्रोल रूम को बस का लाइव लोकेशन मिल जाता है।

तीन माह तक चलाया गया मेगा अभियान

शासन के निर्देश पर परिवहन विभाग द्वारा सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों में वीएलटीडी लगाने जुलाई से सितंबर तक प्रदेशभर में मेगा अभियान चलाया गया। उड़नदस्ता टीम और आरटीओ द्वारा रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर, अंबिकापुर नेशनल हाईवे पर बसों को रोककर चेक किया गया। इस दौरान कई खामियां पाई गई।

412 बसों में जीपीएस लगा ही नहीं था

210 बसों में जीपीएस लगा था, पर वह बंद था

85 बसों में पैनिक बटन था, पर काम नहीं कर रहा था

इस दौरान चालानी कार्रवाई कर पहले चरण में 300 बसों को 15 दिन की मोहलत देते हुए अंतिम नोटिस जारी किया गया। उनमें से 140 बसों ने तुरंत जीपीएस लगवाकर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा लिया, लेकिन 170 बस मालिकों ने नोटिस की अनदेखी की, जिसके बाद उन बसों का परमिट रद्द करने की कार्रवाई की गई।

नियम तोड़ा तो होगी सख्त कार्रवाई बस मालिकों समेत अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़े वाहन मालिकों को परिवहन विभाग के नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। नियमों तथा सुरक्षा को ताक पर रखकर गाड़ी चलाने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिन बस मालिकों का परमिट निरस्त किया गया है। उनके द्वारा परमिट शर्तों का उल्लंघन किया गया है। – डी. रवि शंकर, अपर परिवहन आयुक्त

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