रश्मिका मंदाना ही थीं ‘मैसा’ के लिए सही चॉइस, डायरेक्टर रवींद्र पुल्ले ने बताई सही वजह
मुंबई। रश्मिका मंदाना अपनी आगामी एक्शन ड्रामा फिल्म ‘मैसा’ में खुद का एक बिल्कुल अलग रूप दर्शकों के सामने पेश करने जा रही हैं। निर्देशक रविंद्र पुल्ले की इस फिल्म में रश्मिका एक साहसी गोंड आदिवासी महिला की भूमिका निभा रही हैं। इस किरदार के लिए अभिनेत्री ने काफी कठिन तैयारी की है, जिसमें हथियार चलाने की ट्रेनिंग और एक्शन वर्कशॉप शामिल हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने फिल्म के सबसे चुनौतीपूर्ण सीक्वेंस में से एक अंडरवॉटर फाइट सीन भी खुद किया है।
पुल्ले ने बताया कि लगभग साढ़े तीन मिनट लंबे अंडरवॉटर सीक्वेंस को शूट करना शुरुआत में बेहद मुश्किल माना जा रहा था। जिसके बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “शुरुआत में हमने सोचा था कि इसके लिए डुप्लीकेट का इस्तेमाल करेंगे। लेकिन जब मैंने यह सीन एक स्टंटवुमन को बताया, तो उन्होंने कहा कि वह इसे नहीं कर पाएंगी। तभी रश्मिका मंदाना आगे आईं और उन्होंने कहा कि वह यह सीन खुद करने की कोशिश करेंगी।”

इस सीक्वेंस की शूटिंग तीन दिनों तक चली। इस दौरान रश्मिका ने करीब 20 घंटे पानी के अंदर बिताए, और लगभग 25 फीट की गहराई पर शूटिंग की। वहां दृश्यता बहुत कम थी और पानी भी काफी ठंडा था। रश्मिका को अपनी आंखें खुली रखनी थीं और अपने भाव भी दिखाने थे, इसलिए वह गॉगल्स भी नहीं पहन सकती थीं।
पुल्ले ने कहा, “उन्होंने यह सब संभाल लिया।” इस सीक्वेंस में सांसों पर नियंत्रण रखने और डाइविंग की तकनीकों का भी काफी इस्तेमाल किया गया था।
पुल्ले ने यह भी बताया कि रश्मिका ने इससे पहले स्क्रीन पर इस तरह का हार्डकोर एक्शन या हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया था। इसलिए इस भूमिका के लिए उनकी ट्रेनिंग बेहद महत्वपूर्ण थी।
उन्होंने कहा, “मैंने उनके हथियार चलाने की ट्रेनिंग के लिए स्थानीय पुलिस विभाग से अनुमति ली थी। लेकिन उन्होंने हथियार चलाना सीख लिया और इस भूमिका के लिए वह बिल्कुल परफेक्ट थीं।”
हालांकि, निर्देशक के लिए रश्मिका की इस भूमिका के लिए उपयुक्तता सिर्फ उनके शारीरिक बदलाव तक सीमित नहीं थी। पुल्ले इससे पहले ‘सीता रमम’ में रश्मिका के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने फर्स्ट असिस्टेंट डायरेक्टर, अतिरिक्त डायलॉग राइटर और कुछ सीक्वेंस के सेकंड-यूनिट डायरेक्टर के रूप में काम किया था।
उसी दौरान उन्होंने रश्मिका में कुछ ऐसा देखा, जो उन्हें मैसा के किरदार के लिए बिल्कुल सही लगा।
पुल्ले ने कहा, “मुझे उनकी आंखें बहुत पसंद हैं। एक सीक्वेंस में मैंने उनकी आंखों में गुस्से की जो तीव्रता देखी, उसी वक्त मुझे पता चल गया था कि मुझे मेरी मैसा मिल गई है।”
निर्देशक ने बताया कि उन्होंने उस समय रश्मिका से कहा था कि एक दिन वह उनकी फिल्म की हीरोइन बनेंगी। बाद में जब उन्होंने उन्हें ‘मैसा’ की कहानी सुनाई, तो उनका यह विश्वास सच साबित हुआ।
फिल्म के एक्शन सीक्वेंस के लिए रश्मिका ने इटली और थाईलैंड में ट्रेनिंग ली, जहां उन्होंने अलग-अलग एक्शन पोजिशन और किकिंग तकनीकें सीखीं।
पुल्ले ने कहा, “उन्होंने बहुत मेहनत की है और अपना 1000 प्रतिशत दिया है। उन्होंने कभी भी मुझसे ‘ना’ नहीं कहा।”
निर्देशक ने यह भी बताया कि शूटिंग के आखिरी महीने में चोट लगने के बावजूद रश्मिका ने काम जारी रखा।
उन्होंने कहा, “उस आखिरी महीने में भी हम शूटिंग कर रहे थे और उन्हें चोट लगी थी। लेकिन तीन घंटे आराम करने के बाद उन्होंने दोबारा शूट पूरा किया। वह काफी दर्द में थीं और डॉक्टर ने उन्हें ब्रेक लेने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने फिर भी शूट पूरा किया। वह इस मामले में बहुत समर्पित हैं।”
‘मैसा’ के साथ रश्मिका न सिर्फ एक बेहद शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण एक्शन भूमिका निभा रही हैं, बल्कि एक सांस्कृतिक रूप से जड़े हुए किरदार को भी पर्दे पर ला रही हैं। नवंबर में रिलीज होने वाली यह फिल्म रश्मिका के बढ़ते फिल्मी सफर में एक अलग तरह की फिल्म के रूप में सामने आ रही है।
फिल्म में वह एक महिला-केंद्रित एक्शन कहानी के केंद्र में हैं और दर्शकों को उनका ऐसा रूप देखने को मिलेगा, जिसे उन्होंने इससे पहले शायद ही कभी देखा हो।







