बिलासपुर, 24 सितम्बर। पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के व्यावसायिक ज्ञान, कार्यकुशलता और विवेचना क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से रक्षित आरक्षी केंद्र बिलासपुर के चेतना हॉल में तीन दिवसीय रेंज स्तरीय रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किया गया। पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग के निर्देश एवं उप पुलिस महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण में बिलासपुर रेंज के विभिन्न जिलों से आरक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर तक के 150 अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने रिफ्रेशर कोर्स का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को कोर्स की उपयोगिता बताते हुए नवीन आपराधिक कानूनों में हुए बदलावों की जानकारी गंभीरता से समझने और उन्हें पुलिस कार्यप्रणाली में प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग में लगातार तकनीक और कानूनों में बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों एवं कर्मचारियों का समय-समय पर प्रशिक्षण जरूरी है, ताकि वे व्यावहारिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान आउटडोर एवं इनडोर दोनों सत्र आयोजित किए गए। आउटडोर सत्र में पीटी-परेड, शस्त्रों को खोलने-जोड़ने तथा बलवा नियंत्रण ड्रिल का अभ्यास कराया गया। वहीं इनडोर प्रशिक्षण में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के महत्वपूर्ण प्रावधानों एवं संशोधनों की जानकारी दी गई। विवेचना के दौरान कानून की नई व्यवस्थाओं को लागू करने और प्रकरणों के त्वरित निराकरण पर भी प्रशिक्षण दिया गया।

तकनीकी पुलिसिंग के तहत साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध, CCTNS और फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की भूमिका पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। इसके अलावा पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तनाव प्रबंधन, योग और फिजियोथैरेपी का विशेष सत्र आयोजित किया गया।
समापन सत्र में पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने प्रशिक्षणार्थियों से सीधे संवाद किया और विवेचना एवं पुलिस कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल पूछे। उन्होंने प्रभावी बीट पुलिसिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बीट सिस्टम के माध्यम से क्षेत्र की गतिविधियों, संदिग्ध व्यक्तियों और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लगातार प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने ज्वेलरी शॉप में हुई लूट की घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी और पुलिस के समन्वित प्रयासों से आरोपियों की पहचान में मदद मिली।
आईजी गर्ग ने सामुदायिक पुलिसिंग को भी अपराध नियंत्रण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने पुलिस और आम नागरिकों के बीच बेहतर संवाद, विश्वास और समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया। प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। तीन दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स के माध्यम से पुलिस बल को नवीन कानून, विवेचना, साइबर सुरक्षा, CCTNS, FSL, बलवा नियंत्रण, शारीरिक दक्षता, तनाव प्रबंधन और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अद्यतन प्रशिक्षण दिया गया।







