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जादू-टोना का आरोप लगा 9वीं के छात्र को स्कूल से निकाला बाल आयोग ने लिया संज्ञान…

रायपुर,18 सितंबर। रायपुर के प्रयास आवासीय विद्यालय में कक्षा 9वीं के 13 साल के छात्र के खिलाफ तंत्र क्रिया में शामिल होने जैसे कथित आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है। इन आरोपों के बाद छात्र को टीसी देकर स्कूल से निकाल दिया गया। अब यह मामला बाल आयोग तक पहुंच गया है।हालांकि, छात्र पर लगाए गए तंत्र क्रिया से जुड़े आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। छात्र के परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने उन्हें पूरी जानकारी दिए बिना बच्चे को स्कूल से बाहर कर दिया और टीसी दे दी। परिजनों ने मुख्यमंत्री शिकायत सेल में भी शिकायत की है।इधर, स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छात्र के व्यवहार को लेकर उसकी काउंसलिंग कराई गई थी।

हॉस्टल अधीक्षक ने दावा किया कि छात्र अंधेरे में बैठता था और कमरे में आकृतियां बनाता था। इससे हॉस्टल में रहने वाले कुछ बच्चे डर गए थे।हालांकि, मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस पर संज्ञान लिया है। आयोग ने छात्र की टीसी रद्द कर उसकी पढ़ाई दोबारा जारी रखने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए हैं।साथ ही आयोग ने प्रयास विद्यालय के प्रिंसिपल और अधीक्षक को 21 सितंबर को आपातकालीन खंडपीठ के सामने पेश होने को कहा है। उन्हें मामले से जुड़े दस्तावेज और अपना पक्ष भी रखने को कहा गया है।परिजनों के मुताबिक, छात्र का 3 सितंबर को प्रयास आवासीय विद्यालय में दाखिला हुआ था। इसके करीब दो सप्ताह बाद उसे हॉस्टल से बाहर कर टीसी दे दी गई। परिवार का आरोप है कि बच्चे पर तंत्र क्रिया से जुड़े आरोप लगाए गए और इसी आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।परिजनों ने मुख्यमंत्री शिकायत सेल में भी शिकायत की है।

उनका कहना है कि बच्चे के खिलाफ कार्रवाई से पहले उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं दी गई। परिवार ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।वहीं, स्कूल प्रबंधन ने मामले को लेकर अपना पक्ष भी रखा है। हॉस्टल अधीक्षक आशीष पांडेय ने बताया कि छात्र के व्यवहार को लेकर उसकी काउंसलिंग कराई गई थी। संस्था का कहना है कि छात्र अक्सर अंधेरे में बैठता था और कमरे में आकृतियां बनाता था। इससे हॉस्टल में रहने वाले कुछ दूसरे बच्चे डर गए थे।स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, इस बारे में छात्र के परिजनों को बुलाकर जानकारी दी गई थी। प्रबंधन का कहना है कि छात्र को टीसी देने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया गया था। परिजनों ने खुद टीसी देने के लिए लिखित आवेदन दिया था।

अभिभावक के आवेदन और सामने आए तथ्यों को देखने के बाद आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13(1)(ज) और धारा 14 के तहत यह कार्रवाई की है।आयोग ने सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, रायपुर को मामले की पूरी जांच कर लिखित रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। आयोग अध्यक्ष ने अधिकारी से फोन पर बात कर जरूरी कार्रवाई करने को भी कहा है।आयोग ने छात्र की टीसी रद्द करने और उसकी पढ़ाई दोबारा शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने साफ कहा है कि मामले का अंतिम फैसला होने तक छात्र की पढ़ाई किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होनी चाहिए।मामले की जांच के लिए प्रयास विद्यालय के प्रिंसिपल और अधीक्षक को 21 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे आयोग के कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। दोनों अधिकारियों को जरूरी दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने को कहा गया है।जांच में यह पता लगाया जाएगा कि छात्र पर लगाए गए आरोपों का आधार क्या था, उसे टीसी देने की प्रक्रिया कैसे अपनाई गई और इसकी जानकारी छात्र के परिजनों को कब और किस तरह दी गई। फिलहाल आयोग ने छात्र की पढ़ाई जारी रखने को प्राथमिकता दी है।

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