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किसानों की सुविधा के लिए मूल सहकारी समिति में ही नियुक्त किए जाएं धान खरीदी प्रभारी : प्रवीण दुबे

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  • मुख्य सचिव को पत्र लिखकर भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक ने की मांग, कहा- दूसरे केंद्रों में प्रभार देने से समितियों को हो रहा आर्थिक नुकसान

कोरबा/बिलासपुर, 03 नवंबर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को सुचारू बनाने और किसानों को होने वाली परेशानियों से बचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी सहकारिता प्रकोष्ठ ने महत्वपूर्ण मांग उठाई है। प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रवीण कुमार दुबे ने छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सहकारी समिति के संस्था प्रबंधकों को उनकी मूल सहकारी समिति में ही धान खरीदी प्रभारी नियुक्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि इस व्यवस्था से किसानों को सुविधा मिलेगी और धान खरीदी केंद्रों में बेहतर समन्वय के साथ खरीदी कार्य संपन्न हो सकेगा।

मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में प्रवीण दुबे ने उल्लेख किया है कि पिछले कुछ वर्षों से सहकारी समितियों के संस्था प्रबंधकों को उनकी मूल समिति के बजाय अन्य धान खरीदी केंद्रों का प्रभारी बनाया जा रहा है। इसके कारण संबंधित समितियों को कई तरह की प्रशासनिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के माध्यम से किसानों को दिए जाने वाले ऋण की जानकारी नए धान खरीदी प्रभारी के पास उपलब्ध नहीं रहती। ऐसे में किसानों द्वारा लिए गए ऋण और उनकी वास्तविक स्थिति की जानकारी के अभाव में ऋण वसूली की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसका असर बैंक के एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) पर भी पड़ता है और अंततः सहकारी समितियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मूल समिति से बाहर के खरीदी केंद्रों में प्रभारी नियुक्त किए जाने के कारण संस्था प्रबंधकों को वहां के किसानों की पूरी जानकारी नहीं होती। इससे किसानों और धान खरीदी केंद्र के प्रभारियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में कठिनाई आती है। परिणामस्वरूप खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था की स्थिति बनती है और किसानों को अपना धान बेचने के दौरान अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

प्रवीण दुबे ने मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि किसानों के हितों और सहकारी समितियों की आर्थिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए संस्था प्रबंधकों को उनकी मूल सहकारी समिति में ही धान खरीदी प्रभारी बनाने के लिए संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस निर्णय से धान खरीदी व्यवस्था अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी तथा किसानों को समय पर बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

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