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RAIPUR : OTP से डिजिटल अरेस्ट तक छात्रों को साइबर फ्रॉड से बचने की दी सीख…

रायपुर,10सितम्बर । बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन धोखाधड़ी के बीच युवाओं को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में ‘साइबर जागृति – साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को फिशिंग, UPI और OTP फ्रॉड, सेक्सटॉर्शन, सोशल मीडिया पर पहचान की चोरी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर अपराधों की पहचान तथा उनसे बचाव के आसान और प्रभावी तरीके बताए गए।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। रायपुर पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला, एनआईटी रायपुर के निदेशक प्रभारी डॉ. समीर बाजपेयी, डीसीपी वेस्ट रॉबिन्सन गुरिया, एडीसीपी साइबर डॉ. गौरव मंडल सहित पुलिस अधिकारी, एनआईटी के अधिकारी, संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना, अनजान व्यक्ति को OTP देना या जल्दबाजी में ऑनलाइन भुगतान करना बड़ी आर्थिक हानि का कारण बन सकता है।

एडीसीपी साइबर डॉ. गौरव मंडल ने कहा कि साइबर अपराधी केवल मोबाइल फोन या बैंक खातों को निशाना नहीं बनाते, बल्कि लोगों के मनोविज्ञान का भी फायदा उठाते हैं। लालच, भय, जल्दबाजी और जानकारी का अभाव साइबर ठगी का शिकार बनने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि साइबर धोखाधड़ी होने की स्थिति में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। पीड़ित को बिना देरी किए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए और साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।


एनआईटी रायपुर के निदेशक प्रभारी डॉ. समीर बाजपेयी ने विद्यार्थियों को साइबर स्वयंसेवक के रूप में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थी स्वयं डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने के साथ अपने परिवार, परिचितों और समाज के दूसरे लोगों को भी साइबर अपराध से बचने के तरीके बता सकते हैं। रायपुर पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला ने साइबर धोखाधड़ी को वैश्विक स्वरूप का अपराध बताते हुए जागरूकता को इससे बचने का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के जरिए धनराशि देश से बाहर चले जाने के बाद उसे वापस प्राप्त करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

ऐसे में ठगी होने से पहले सावधानी और जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से साइबर स्वयंसेवक बनने और अपने परिवार तथा परिचितों को भी सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। मुख्य अतिथि मंत्री दयालदास बघेल ने डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच सतर्कता को आवश्यक बताया। उन्होंने नागरिकों से अपना OTP, PIN, पासवर्ड और दूसरी निजी या बैंकिंग जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर संपर्क करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि अनजान लिंक, संदिग्ध कॉल, फर्जी निवेश प्रस्ताव, डिजिटल अरेस्ट की धमकी और सोशल मीडिया पर संदिग्ध प्रोफाइल को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को स्मृति-चिह्न प्रदान किए गए और राष्ट्रगान के साथ आयोजन का समापन हुआ। कार्यक्रम का समन्वय एडीसीपी वेस्ट राहुल देव शर्मा, एसीपी आजाद चौक इशू अग्रवाल, एनआईटी रायपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रूपेश कुमार देवांगन और सहायक प्रोफेसर डॉ. नितेश के. भारद्वाज ने किया।

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