कोरबा, 18 सितम्बर। बरपाली विद्युत वितरण केंद्र के अंतर्गत तुमान फीडर के ग्राम पंचायत सलिहाभांठा( पूर्व सांसद स्व.डॉ. बंशीलाल महतो के गृहग्राम) के ग्रामीण प्रातः 8 बजे से भीषण गर्मी एवं उमस में उबल रहे हैं। प्रातः 6.30 बजे केबल जलने की घटना के बाद प्रातः 8 बजे से बंद हुई बिजली की आपूति दोपहर 2 बजे तक नहीं हो पाई। विद्युत विभाग के निकम्मे अमलों की सुस्ती एवं अकर्मण्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। एई शेखर सोनी को फोनकर पर दी गई सूचना के बाद भी विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हुई। मेंटेनेंस अमला अभी भी मरम्मत कार्य में जुटा हुआ है।
गणेशोत्सव के पर्व के बीच 6 घण्टे से अधिक समय से बंद हुई बिजली ने ग्रामवासियों की चिंता एवं निराशा बढ़ा दी है। आधी गांव से अधिक की आबादी बोरवेल पर निर्भर है। लिहाजा लंबे समय तक बिजली बंद होने पर ग्रामीणों की मुसीबत बढ़ जाती है। तकनीकी फाल्ट दुरुस्त करने की बात तो दूर मेंटनेस अमला स्पॉट पर सुधार के लिए तत्परता से नहीं पहुंचता है । मनमाने कार्यशैली की वजह से उपभोक्ताओं के मन में शासन प्रशासन के प्रति अविश्वास की भावना उत्पन्न हो रही है। विद्युत वितरण कंपनी में अमले की कमी से आमजन वाकिफ हैं,लेकिन शिकायतों के उपरांत भी सुधार की दिशा में त्वरित पहल नहीं किए जाने से सरकार व सिस्टम पर सवाल उठ रहे।
CM हेल्पलाइन बना मजाक,1912 में भी समस्या का नहीं हुआ निदान
विद्युत बंद संबंधी शिकायतों के निराकरण में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 मजाक बनकर रह गई है। शिकायत के बाद शिकायत विद्युत वितरण कंपनी को अंतरित कर दी जाती है। लेकिन वहाँ से भी त्वरित समाधान नहीं हो पाता है। इस मामले में भी विद्युत शिकायत निवारण टोल फ्री नंबर 1912 में सूचना देने के बाद भी खबर लिखे जाने तक विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हुई। करीब डेढ़ बजे पहुंचा अमला सुधार कार्य में लगा हुआ है।
शिकायत के बाद भी नहीं हटीं JE
बरपाली फीडर के जेई (कनिष्ठ अभियंता ) सलोनी टोप्पो फीडर को विद्युत व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाए रखने में नाकाम रही हैं। छोटी सी फाल्ट दिनभर में इनके नेतृत्व में तत्परता से दुरुस्त नहीं हो पाती। साथ ही आमजन के प्रति व्यवहार कुशल भी नहीं है। इन्हीं सब तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए लोकहित में बीते समाधान शिविर में इनके स्थानांतरण की मांग की गई थी। जानकारी अनुसार विभाग द्वारा ऑन द रिकार्ड इनका स्थानांतरण भी किया गया था।जिसके बाद वो लंबी छुट्टी में चली गई थीं। लेकिन वर्तमान में उन्होंने पुनः कार्यभार संभाल लिया है। जिसके बाद सुशासन की सरकार के कथनी और करनी के प्रति सवाल उठ रहे।







