धमतरी, 15 अक्टूबर 2026। साइबर अपराधों की रोकथाम और आम नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से बचाने के लिए धमतरी पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। इसी कड़ी में पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, न्यायालय परिसर धमतरी के सभागार में 14 अक्टूबर को पैरालीगल वालेंटियर्स (PLVs) के लिए विशेष साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न थानों से जुड़े वालेंटियर्स को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर ठगी, ऑनलाइन निवेश फ्रॉड और साइबर अपराधों के नए तरीकों से बचाव की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक चंद्रकांत साहू और उनकी तकनीकी टीम ने पैरालीगल वालेंटियर्स को साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए हथकंडों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने समझाया कि किस तरह साइबर ठग पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स विभाग या न्यायालय के अधिकारी बनकर लोगों को वीडियो कॉल के माध्यम से डराते हैं और डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर उनसे पैसे वसूलने का प्रयास करते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि किसी भी जांच एजेंसी द्वारा वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे मांगने पर घबराने के बजाय तत्काल पुलिस को सूचना देनी चाहिए।
साइबर पुलिस की टीम ने ऑनलाइन निवेश के नाम पर अधिक मुनाफे का लालच देने, घर बैठे कमाई के फर्जी टास्क, बैंक खाते और सिम कार्ड की केवाईसी अपडेट करने के बहाने होने वाली ठगी के बारे में भी जानकारी दी। वालेंटियर्स को बताया गया कि साइबर अपराधी फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया प्रोफाइल और संदिग्ध लिंक के जरिए लोगों की व्यक्तिगत एवं बैंकिंग जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।
प्रशिक्षण में मोबाइल और बैंकिंग सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी और बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करने की सलाह दी गई। इसके अलावा संदिग्ध एपीके फाइल डाउनलोड करने और अनजान लोगों के कहने पर AnyDesk या TeamViewer जैसे स्क्रीन-शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करने से बचने की समझाइश दी गई।
धमतरी पुलिस ने बताया कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और संबंधित बैंक खातों पर आवश्यक कार्रवाई की संभावना बढ़ जाती है।
कार्यक्रम में पैरालीगल वालेंटियर्स से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाने की अपील की गई। उन्हें हाट-बाजारों, स्कूलों, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी और फर्जी निवेश योजनाओं के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। विशेष रूप से महिलाओं, विद्यार्थियों, बुजुर्गों और ग्रामीण नागरिकों को साइबर अपराधियों के नए तरीकों से अवगत कराने पर जोर दिया गया।
धमतरी पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक और ऑनलाइन लालच से सतर्क रहें। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें। पुलिस का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता से ही साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।







