नई दिल्ली ,12 सितंबर: भारतीय खेलों का लंबा इतिहास विवादों से भरा हुआ है. एशियन गेम्स हों या ओलंपिक या कॉमनवेल्थ गेम्स, जब भी कभी ऐसे गेम्स आते हैं, तो उससे ठीक कुछ दिन पहले भारतीय खिलाड़ियों से जुड़े बवाल सामने आते हैं. अक्सर ये विवाद खिलाड़ियों के डोपिंग में फंसने या सेलेक्शन को लेकर होते हैं. मगर ताजा विवाद से सनसनी फैल गई है. एशियन गेम्स के लिए चुनी गईं वुशु (WUSHU) खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी को अचानक ही टीम से बाहर कर दिया गया, जिसके बाद इस खिलाड़ी ने एक वीडियो जारी कर जान देने की बात कही है.
पहले सेलेक्शन, फिर अचानक हटाया
19 सितंबर से जापान के ऐसी-नागोया में एशियन गेम्स 2026 की शुरुआत हो रही है. इसके लिए वुशु की भी एक टीम चुनी गई, जिसमें खिलाड़ियों को सेलेक्शन ट्रायल्स के बाद हुआ. इन्हीं ट्रायल्स में महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में दिव्यांशी चौधरी का सेलेक्शन हुआ था. मगर जब दिव्यांशी जापान जाने के लिए तैयारी कर रही थीं, तभी अचानक शुक्रवार 11 सितंबर को उन्हें बताया गया कि वो गेम्स का हिस्सा नहीं होंगी और उन्हें ड्रॉप कर दिया गया है.
जानकारी के मुताबिक, दिव्यांशी की जगह रोशीबिना देवी नाओरेम को भारतीय वुशु टीम में चुन लिया गया, जिन्हें खुद दिव्यांशी ने ट्रायल्स में हराया था. ये खबर मिलने के बाद दिव्यांशी टूट गईं और उन्होंने एक वीडियो रिलीज कर अपना दर्द बयान करते हुए नाइंसाफी का आरोप लगाया और साथ ही ये तक कह दिया कि उनके लिए जीने का कोई मतलब नहीं है. पटियाला में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (NIS) में तैयारी कर रही दिव्यांशी ने इंस्टीट्यूट की ही छत पर खड़े होकर ये वीडियो बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल है और जिससे बवाल मच गया है.
दिव्यांशी ने वीडियो में क्या आरोप लगाए?
अपने 9 मिनट लंबे वीडियो में दिव्यांशी ने कहा है, “मैं इसके लिए मजबूर हूं, मैं बहुत तंग आ गई हूं और मुझे नहीं लगता आगे जीने का कोई मतलब है. मुझे मानिसक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है. जून, जुलाई से अब सितंबर तक मेरे पीछे पड़ी हैं क्योंकि वो (रोशीबिना देवी) जाना चाहती हैं एशियन गेम्स में. सचिन तेंदुलकर का भी वक्त आया था, उनकी जगह कोई नया खिलाड़ी आया था.. अब जब मैंने उन्हें हरा दिया, मेरा हक है वहां जाने का, उनका हक नहीं है, मुझे जाने दिया जाए.”
दिव्यांशी ने आरोप लगाया कि सीनियर वुशु खिलाड़ी रोशीबीना ने अपनी पहुंच का गलत इस्तेमाल किया और खेल मंत्रालय से अपनी सिफारिश की. लगातार रोते-बिलखते हुए दिव्यांशी ने आरोप लगाया कि रोशीबिना ने जानबूझकर उन्हें चोटिल करने की कोशिश भी की. दिव्यांशी ने आगे कहा कि उन्हें एक चोट लगी, जिसके बारे में डॉक्टर ने कहा कि वो जल्द ही टेपिंग से ठीक हो जाएगा लेकिन उनकी रिपोर्ट रोशीबिना के साथ शेयर की गई. यहां तक दावा किया कि नाम काटने के बारे में उन्हें तक नहीं बताया गया.
मां-पिता से माफी मांगते हुए कही जान देने की बात
वीडियो के अंत में दिव्यांशी ने NIS पटियाला की छत पर अपना किट बैग दिखाया और आत्महत्या की बात की. उन्होंने अपनी मां-पिता से माफी मांगते हुए कहा कि उनके पास कोई और विकल्प नहीं बचा है. दिव्यांशी ने कहा कि वो ये नहीं करना चाहती थीं लेकिन अब इसके लिए मजबूर हो गई हैं. दिव्यांशी राजस्थान के कोटा की रहने वाली हैं. 18 साल की ये खिलाड़ी राजस्थान की ही महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी में ट्रेनिंग लेती हैं. वो पहले भी कई टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और एशियन गेम्स के ट्रायल्स में उन्होंने सेमीफाइनल में रोशीबिना को हराया था.
नाम काटने पर क्या बोली वुशु एसोसिएशन?
स्पोर्टस्टार की रिपोर्ट में भारतीय वुशु एसोसिएशन के अध्यक्ष के हवाले से बताया गया है कि दिव्यांशी का नाम उन्होंने नहीं काटा बल्कि ये कदम स्पोर्ट्स एथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने उठाया है. इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि दिव्यांशी के घुटने में चोट लगी थी, जिसे उन्होंने छुपाया था. कोचिंग स्टाफ ने बताया कि वो इसके चलते ट्रेनिंग में भी हिस्सा नहीं ले रही थी. उन्होंने बताया कि SAI ने ही दिव्यांशी का मेडिकल टेस्ट कराया, जिसमें चोट की पुष्टि हुई. उन्होंने साथ ही ये भी बताया कि रोशीबिना को इसलिए भेजा गया क्योंकि फाइनल में दिव्यांशी ने जिस खिलाड़ी को हराया था, वो भी चोटिल है. ऐसे में सेमीफाइनल में हारने वाली रोशीबिना को चुना गया.







