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राज्योत्सव में सम्मानित हुईं कोरबा की नन्हीं कथक कलाकार योधा पर्वथम

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  • जिला प्रशासन ने प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न देकर किया सम्मानित, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कथक नृत्य में हासिल कर चुकी हैं उपलब्धियां

कोरबा, 02 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव-2026 के अवसर पर आयोजित समारोह में कोरबा की उभरती बाल कथक कलाकार कुमारी योधा पर्वथम को उनकी सांस्कृतिक प्रतिभा एवं कथक नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। 2 नवंबर को आयोजित कार्यक्रम में जिला प्रशासन कोरबा की ओर से उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि से योधा ने न केवल अपने परिवार और विद्यालय, बल्कि पूरे कोरबा जिले का गौरव बढ़ाया है।

योधा पर्वथम दिल्ली पब्लिक स्कूल, बालको नगर, कोरबा में कक्षा पांचवीं की छात्रा हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उनकी भारतीय शास्त्रीय नृत्य कथक में विशेष रुचि है। वे पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से कथक का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। प्रसिद्ध कथक गुरु पंडित मोरध्वज वैष्णव के मार्गदर्शन में वे रायगढ़ घराने की कथक शैली की बारीकियां सीख रही हैं। निरंतर अभ्यास, अनुशासन और नृत्य के प्रति समर्पण ने कम उम्र में ही उन्हें एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।

योधा अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं। उनकी प्रमुख उपलब्धियों में अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक ओलंपियाड, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)-2024 में रजत पुरस्कार हासिल करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की कथक नृत्य प्रतियोगिताओं में प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन में जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया जाना उनके लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सम्मान उनकी अब तक की साधना, कला के प्रति समर्पण और निरंतर मेहनत का प्रतिफल है। उनकी सफलता से परिवारजनों, गुरुजनों, विद्यालय परिवार और जिले के कला प्रेमियों में खुशी का माहौल है।

योधा के पिता सतीश कुमार पर्वथम एवं माता ममता पर्वथम ने इस सम्मान के लिए जिला प्रशासन और आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने योधा की उपलब्धियों का श्रेय उनके कथक गुरु पंडित मोरध्वज वैष्णव के मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और परिवार के प्रोत्साहन को दिया।

कम उम्र में भारतीय शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहीं योधा पर्वथम की यह उपलब्धि अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। उनकी सफलता छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और कथक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

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