रायपुर, 11 सितम्बर । छत्तीसगढ़ में जमीन के इस्तेमाल को लेकर सरकार बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। प्रस्तावित नियमों में पहली बार अलग-अलग भूमि उपयोग क्षेत्रों में किन गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाएगा, इसे स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। नए प्रस्ताव के मुताबिक, आवासीय जमीन पर गोदाम, पोल्ट्री फार्म, डेयरी, बूचड़खाना और कई तरह के उद्योग नहीं चलाए जा सकेंगे। वहीं कृषि भूमि पर बड़े मॉल, बड़ी आवासीय परियोजनाओं, व्यावसायिक परिसरों और खतरनाक गतिविधियों पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
सरकार ने इस मसौदे पर आम लोगों से 15 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक क्षेत्रों में भी कई गतिविधियां प्रतिबंधित प्रस्तावित संशोधन में सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक भूमि उपयोग वाले क्षेत्रों के लिए भी कई प्रतिबंध तय किए गए हैं। यहां पूर्ण आवासीय टाउनशिप, अनुमोदित कर्मचारी आवास को छोड़कर, भारी वाणिज्यिक गतिविधियां और हरित, नारंगी एवं लाल श्रेणी के उद्योग प्रतिबंधित किए जाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा खतरनाक पदार्थों का भंडारण, असंबंधित व्यावसायिक गतिविधियां, थोक बाजार, बूचड़खाने, कबाड़खाने, खनन, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन, पोल्ट्री फार्म और गोदाम जैसी गतिविधियों पर भी रोक प्रस्तावित है।
औद्योगिक क्षेत्र में भी कुछ गतिविधियों पर रोक औद्योगिक भूमि के लिए भी मसौदे में कई प्रावधान किए गए हैं। प्रस्ताव के अनुसार, अनुमोदित कर्मचारी आवास, छात्रावास और डॉरमिटरी को छोड़कर पूर्ण आवासीय टाउनशिप, स्कूल और संक्रामक रोग अस्पताल जैसी गतिविधियां प्रतिबंधित होंगी। इसके साथ ही जेल, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम और ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन, डेयरी और पोल्ट्री फार्म पर भी रोक का प्रस्ताव है। आवासीय जमीन पर नहीं बना सकेंगे गोदाम और पोल्ट्री फार्म नए नियमों का सबसे सीधा असर आवासीय क्षेत्रों में जमीन के इस्तेमाल पर पड़ सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक यहां हरित, नारंगी, लाल और नीली श्रेणी के उद्योग नहीं चलाए जा सकेंगे। इसके अलावा गोदाम, बूचड़खाने, कबाड़खाने, संक्रामक रोग अस्पताल, जेल, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो और गैस गोदाम जैसी गतिविधियां भी प्रतिबंधित होंगी।
आवासीय क्षेत्रों में पशुपालन, मत्स्य पालन, दुग्ध उत्पादन, पोल्ट्री फार्म, श्मशान एवं कब्रिस्तान से जुड़ी गतिविधियों और खनन पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है। परिवहन क्षेत्र में आवासीय बस्तियां नहीं प्रस्तावित नियमों के अनुसार परिवहन क्षेत्रों में आवासीय बस्तियां बसाने पर रोक होगी। इसके अलावा खतरनाक रसायनों का भंडारण, असंगत व्यावसायिक गतिविधियां और नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योग भी प्रतिबंधित होंगे। पशुपालन, मत्स्य पालन, डेयरी, पोल्ट्री, खनन तथा श्मशान और कब्रिस्तान से संबंधित गतिविधियों को भी इन क्षेत्रों से बाहर रखने का प्रस्ताव है। वाणिज्यिक क्षेत्रों में खतरनाक उद्योगों पर रोक वाणिज्यिक क्षेत्रों में नारंगी, लाल और नीली श्रेणी के उद्योगों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है। साथ ही खतरनाक एवं विषैले रसायनों और विस्फोटकों का भंडारण भी नहीं किया जा सकेगा। पशुपालन, मत्स्य पालन, दुग्ध उत्पादन, पोल्ट्री, श्मशान एवं कब्रिस्तान से संबंधित गतिविधियों और खनन पर भी रोक का प्रस्ताव रखा गया है।
मनोरंजन क्षेत्रों में भी तय होंगे जमीन इस्तेमाल के नियम मनोरंजन एवं आमोद-प्रमोद क्षेत्रों में आवासीय कॉलोनियां, सभी प्रकार के उद्योग, व्यावसायिक परिसर और गोदाम नहीं बनाए जा सकेंगे। इसके अलावा प्रदूषण फैलाने वाली व्यावसायिक गतिविधियां, खनन, खतरनाक पदार्थों का भंडारण, थोक बाजार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन, पोल्ट्री, डेयरी तथा श्मशान एवं कब्रिस्तान से जुड़ी गतिविधियों पर भी रोक प्रस्तावित है। कृषि जमीन पर बड़े मॉल और आवासीय परियोजनाओं पर रोक कृषि भूमि को लेकर भी मसौदे में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
किफायती आवास और एकीकृत टाउनशिप को छोड़कर अन्य आवासीय परियोजनाओं पर रोक का प्रस्ताव है। इसके अलावा व्यावसायिक परिसर, बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट, खतरनाक व्यावसायिक उपयोग, सफेद, हरित, नारंगी और लाल श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं और बड़े मॉल कृषि भूमि पर प्रतिबंधित किए जाने का प्रस्ताव है। 15 दिन में दे सकते हैं आपत्ति और सुझाव आवास एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार, प्रस्तावित मसौदे पर 15 दिनों के भीतर आम लोग अपनी आपत्तियां और सुझाव दे सकते हैं। इसके लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव को लिखित रूप में या ई-मेल के माध्यम से सुझाव भेजे जा सकते हैं। सरकार को प्राप्त होने वाली आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद भूमि विकास नियमों में संशोधन की आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।







