कोरबा, 24 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में 15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत की जांच में सहयोग नहीं करना पंचायत सचिवों को भारी पड़ सकता है। जनपद पंचायत पाली के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान कराए गए विकास कार्यों से संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने, अधूरे दस्तावेज प्रस्तुत करने और जांच दल के समक्ष बयान दर्ज नहीं कराने के मामले में जिला पंचायत सीईओ ने 24 पंचायत सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी संबंधित सचिवों से तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है।
जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत पाली की ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए कार्यों में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने और लाखों रुपए की राशि में कथित अनियमितताओं की शिकायत जिला प्रशासन से की गई थी। शिकायत में ग्रामसभा कार्यवाही पंजी, उपस्थिति पंजी, व्यय प्रमाणक, देयक वाउचर, इनवॉइस बिल, टीडीएस कटौती, जमा राशि और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच के साथ भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई थी।
शिकायत के आधार पर प्रशासनिक जांच शुरू की गई, लेकिन जांच के दौरान कई पंचायत सचिवों ने आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए। कुछ सचिवों ने अधूरे दस्तावेज प्रस्तुत किए, जबकि कुछ ने जांच दल के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान भी दर्ज नहीं कराया। इसे गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत पाली के सीईओ ने 3 सितंबर 2026 को संबंधित पंचायत सचिवों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए उप संचालक पंचायत को प्रतिवेदन भेजा था।
बताया जा रहा है कि प्रतिवेदन मिलने के बावजूद प्रकरण को समय पर सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाने को लेकर भी शिकायतें सामने आई थीं। मामला राज्यपाल, राजभवन और छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव तक पहुंचा था। इसके बाद जिला पंचायत स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हुई।
जिला पंचायत सीईओ की ओर से जारी नोटिस में ग्राम पंचायत बतरा, उड़ता, पुलालीकला, केराझरिया, पोटापानी, तिवरता, धौराभांठा और सिरकीखुर्द के सचिवों द्वारा जांच में अधूरे अभिलेख उपलब्ध कराने अथवा बयान प्रस्तुत नहीं करने का उल्लेख किया गया है।
वहीं ग्राम पंचायत नगोई, केराकछार, नुनेरा, खैराडूबान, धतूरा, दमिया, चोढ़ा, चैतमा, सगुना, डोड़की, सेंद्रीपाली, उतरदा, रंगोले, मुरली, बक्साही और सराईपाली के सचिवों पर जांच दल को आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने तथा अपना कथन दर्ज नहीं कराने का आरोप है।
नोटिस में पंचायत सचिवों के इस कृत्य को उच्च अधिकारियों के आदेशों और निर्देशों की अवहेलना के साथ शासकीय कार्य में अनुशासनहीनता, उदासीनता एवं घोर लापरवाही माना गया है। इसे छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1999 के विरुद्ध कदाचार की श्रेणी में रखते हुए संबंधित सचिवों से पूछा गया है कि उनके विरुद्ध निलंबन की अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।
सभी संबंधित पंचायत सचिवों को तीन दिवस के भीतर जिला पंचायत सीईओ के समक्ष उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं देने पर उनके विरुद्ध एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इस कार्रवाई से पंचायत विभाग में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, अभी किसी पंचायत सचिव के निलंबन की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। वहीं 15वें वित्त आयोग की राशि में कथित अनियमितताओं की शिकायत की जांच का अंतिम निष्कर्ष भी सामने नहीं आया है।
यदि संबंधित सचिवों के जवाब असंतोषजनक पाए जाते हैं और बड़ी संख्या में निलंबन की कार्रवाई होती है, तो यह जिले के पंचायत विभाग की एक बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई साबित हो सकती है।








