बालोद, 21 अक्टूबर 2026। जिस रावघाट क्षेत्र के लोगों ने आजादी के बाद से अब तक अपने इलाके में ट्रेन चलते नहीं देखी थी, वहां मंगलवार को रेल सेवा की शुरुआत ने एक नया इतिहास रच दिया। वर्षों से रेल सुविधा का इंतजार कर रहे लोगों के लिए यह दिन किसी सपने के पूरा होने जैसा रहा। इस ऐतिहासिक सफर की एक खास बात यह भी रही कि रावघाट से रायपुर तक मेमू ट्रेन के परिचालन की जिम्मेदारी महिला लोको पायलट प्रतिभा सिद्धार्थ बंसोड़ ने संभाली। उनके लिए यह केवल ड्यूटी का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक बन गया।
मंगलवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वर्चुअल माध्यम से रावघाट-रायपुर मेमू ट्रेन का उद्घाटन किया। इसके साथ ही लंबे इंतजार के बाद रावघाट क्षेत्र यात्री रेल सेवा से जुड़ गया। नई ट्रेन शुरू होने से बालोद जिले के लोगों को भी रायपुर तक सीधी रेल सुविधा मिलने का रास्ता खुल गया है। उद्घाटन के दिन शाम 5 बजकर 19 मिनट पर मेमू ट्रेन बालोद रेलवे स्टेशन पहुंची। पहले दिन यहां से छह यात्रियों ने तीन टिकट लेकर रायपुर और मड़ौदा के लिए सफर शुरू किया। यात्रियों की संख्या भले ही कम रही, लेकिन यह सफर क्षेत्र के रेल इतिहास में एक नई शुरुआत के रूप में दर्ज हो गया।
इस ट्रेन की कमान संभालने वाली महिला लोको पायलट प्रतिभा सिद्धार्थ बंसोड़ ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि रावघाट तक ट्रेन लेकर पहुंचना उनके लिए बेहद खास रहा। उन्होंने बताया कि जिस इलाके में अब तक लोगों ने ट्रेन नहीं देखी थी, वहां रेलगाड़ी चलाने का अवसर मिलना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।
प्रतिभा ने कहा कि पहले इस क्षेत्र में आवागमन की सुविधाएं सीमित थीं। ऐसे इलाके में पहली बार यात्री ट्रेन पहुंचने से लोगों के जीवन में बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनकी उम्मीदों से कहीं अधिक अच्छा रहा और इस सफर को वह कभी नहीं भूल पाएंगी।
प्रतिभा ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों और अपने विभागीय अधिकारियों का आभार जताया। उनका कहना था कि रावघाट तक ट्रेन पहुंचना केवल रेलवे की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी बड़ी सौगात है, जिन्हें अब तक रेल यात्रा के लिए दूसरी जगहों पर निर्भर रहना पड़ता था।
रावघाट तक रेल पहुंचने के पीछे वर्षों की प्रतीक्षा और कठिन परिस्थितियों में किया गया निर्माण कार्य भी जुड़ा है। दल्लीराजहरा से रावघाट तक लगभग 95 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना पर करीब 1,628 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसके अंतिम चरण में ताड़ोकी से रावघाट तक 17.5 किलोमीटर रेलखंड तैयार किया गया। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रेल लाइन बिछाना बड़ी चुनौती थी। नई रेल सेवा से रावघाट से राजधानी रायपुर तक लगभग 219 किलोमीटर का सफर सामान्य श्रेणी में करीब 55 रुपये में किया जा सकेगा। इससे दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों, छोटे व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और इलाज के लिए बड़े शहर जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
शनिवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलने वाली इस ट्रेन से बालोद जिले के यात्रियों को भी राजधानी तक पहुंचने का एक और विकल्प मिलेगा। पहले दिन बालोद स्टेशन से छह यात्रियों की रवानगी के साथ शुरू हुआ यह सफर आने वाले दिनों में क्षेत्र के लिए कितना उपयोगी साबित होगा, यह यात्रियों की बढ़ती संख्या से स्पष्ट होगा।
रावघाट तक रेल पहुंचने की इस कहानी में सबसे खास पहलू महिला लोको पायलट प्रतिभा बंसोड़ का अनुभव रहा। वर्षों से रेल सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे क्षेत्र में पहली ट्रेन चलाने का अवसर उन्हें मिला। उनके लिए यह सफर इसलिए भी यादगार बन गया, क्योंकि जिस इलाके में कभी ट्रेन पहुंचना एक सपना था, वहां अब नियमित रूप से रेलगाड़ी दौड़ने लगी है।







