धमतरी, 10 मई I छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की तरफ से बुधवार की दोपहर दसवीं-बारहवीं के नतीजे जारी किए गए हैं। ऐसे समय में अक्सर खबरों में पढ़ते हैं कि बोर्ड रिजल्ट से खुश न होने पर छात्र खतरनाक कदम उठा लेते हैं। कमोबेश हमारे समाज में बोर्ड एग्जाम को एक ऐसा हौव्वा बना दिया गया है, मानो यही नंबर इंसान की पूरी जिंदगी तय कर देंगे, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं होता। व्यक्ति को उसका ज्ञान ही जीवन में सफल या असफल बनाता है। समाज में हर फील्ड में चाहे वो फिल्म या सिनेमा जगत हो, खेल जगत हो, प्रशासनिक सेवाएं हो, ऐसे उदाहरण मिलते हैं। जिनमें लोगों ने बोर्ड एग्जाम में बहुत अच्छा नहीं किया, लेकिन वो अपने जीवन में सफल रहे।
हम अगर एक एग्जाम को ही जीवन में सफलता का पैमाना मान लेते हैं, तो बोर्ड रिजल्ट का परफार्मेंस हमें चिंता से भर देता है। सच्चाई यह है कि मनोवैज्ञानिक तौर पर भी अच्छा रिजल्ट पाने वाले ही होनहार हों, ऐसा कहीं भी सिद्ध नहीं हुआ है। कई लोग बोर्ड परीक्षाओं में भले ही बेहतर न कर पाएं, लेकिन अपनी जिंदगी में ऐसा मुकाम हासिल करते हैं, जिसका दुनिया लोहा मानती है।
परफॉर्मेंस प्रेशर होती है वजह-
धमतरी जिला अस्पताल में पदस्थ साइकोलॉजिस्ट प्रीति चांडक ने बताया कि कई बच्चे पढ़ने में बहुत अच्छे होते हैं, लेकिन एग्जाम में वो अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। ऐसा उनके साथ परफॉर्मेंस प्रेशर के कारण होता है। बच्चों को परिवार, स्कूल और आसपास के लोगों से परफार्मेंस को लेकर इतना प्रेशर दे दिया जाता है
कि वो एग्जाम हाल में एंजाइटी का शिकार हो जाते हैं। कई बार वो प्रश्नपत्र सामने आने पर जो आता है, वो भी भूल जाते हैं, या फिर उन्हें लिखने में असुविधा का सामना करना पड़ता है, इस कारण उनका रिजल्ट अच्छा नहीं आता। लेकिन वही लोग जैसे-जैसे परिपक्व होते हैं, उनका एकेडमिक पक्ष बहुत मजबूत होता जाता है और वो बहुत अच्छे रिजल्ट देते हैं।


