कोरबा,06 अक्टूबर 2026। जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत कथित फर्जी जियो टैगिंग और भुगतान का मामला लगातार सामने आ रहा है। अब करतला विकासखंड की ग्राम पंचायत औंराई में अधूरे प्रधानमंत्री आवासों को सरकारी रिकॉर्ड में पूर्ण दर्शाकर हितग्राहियों को योजना की तीनों किस्तों का भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि वास्तविक निर्माणाधीन मकानों की तस्वीरें जियो टैग करने के बजाय किसी अन्य पूर्ण निर्मित मकान की तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड की गईं और इसके आधार पर आवासों को पूर्ण दर्शाते हुए भुगतान जारी कर दिया गया।
ग्राम पंचायत औंराई में बंधाई बाई पति रामलाल, झूल बाई पति अक्तीराम, सुंदर सिंह पिता बीर सिंह और मंगलासो पति अंतराम के नाम से प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। आरोप है कि इन चारों हितग्राहियों के आवास अब तक अधूरे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना के सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें पूर्ण बताया गया है। इतना ही नहीं, प्रथम, द्वितीय और तृतीय किस्त की राशि भी जारी किए जाने की बात सामने आई है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, चारों आवासों के मामले में जियो टैगिंग को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि निर्माणाधीन आवासों के बजाय किसी अन्य पूर्ण मकान की तस्वीरों को जियो टैग कर पोर्टल पर दर्ज किया गया। इसी आधार पर आवासों की प्रगति पूर्ण दर्शाते हुए योजना की राशि का भुगतान किया गया। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जियो टैगिंग और भुगतान में कथित अनियमितताओं के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। लगातार शिकायतें सामने आने के बाद योजना की मॉनिटरिंग व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित योजना में इस तरह की अनियमितता हितग्राहियों के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।
इस मामले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के करतला ब्लॉक समन्वयक दिनबंधु साहू से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर जिला पंचायत कोरबा के पीएम आवास जिला को-ऑर्डिनेटर आशीष कुमार ने कहा कि शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले तिलकेजा पंचायत में भी शिकायत की जांच के बाद कार्रवाई की गई है।
औंराई पंचायत में सामने आए मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अधूरे आवासों को पूर्ण दर्शाने और कथित फर्जी जियो टैगिंग के पीछे कौन जिम्मेदार है। फिलहाल मामला जांच के दायरे में है और ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।







