जांजगीर-चांपा, 5 अक्टूबर 2026। फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी जरिया बन रहा है। जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा निवासी किसान संतराम ने परंपरागत धान की खेती के बजाय बैंगन की खेती अपनाकर इसका उदाहरण पेश किया है। उन्होंने 0.400 हेक्टेयर जमीन में बैंगन की खेती से करीब 1.07 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जो इसी जमीन पर धान की खेती से होने वाले लाभ से करीब 75 हजार रुपये अधिक है।
संतराम के पास कुल 1.400 हेक्टेयर कृषि भूमि है। पहले वे पूरी जमीन पर धान की खेती करते थे। उद्यानिकी विभाग से योजनाओं की जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन मिलने के बाद उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में बैंगन की फसल लगाने का निर्णय लिया।
बैंगन की खेती से उन्हें करीब 90 क्विंटल उत्पादन मिला, जिसे उन्होंने लगभग 1.62 लाख रुपये में बेचा। इनपुट, मजदूरी और अन्य खर्च घटाने के बाद उन्हें करीब 1.07 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
इसके मुकाबले इसी 0.400 हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती से करीब 20 क्विंटल उत्पादन होता था। धान की बिक्री से लगभग 62 हजार रुपये की आय होती थी और लागत घटाने के बाद करीब 32 हजार रुपये का लाभ बचता था। इस तरह बैंगन की खेती से संतराम को धान की तुलना में लगभग 75 हजार रुपये अतिरिक्त लाभ मिला।
संतराम का कहना है कि उद्यानिकी विभाग की योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन और अनुदान से उन्हें नई फसल अपनाने का प्रोत्साहन मिला। अब वे आसपास के किसानों को भी फसल विविधीकरण और उद्यानिकी खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने खेती में नई संभावनाओं का रास्ता खोलने वाली योजनाओं के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया।







