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कोरबा के ताप बिजली संयंत्रों में कोयला स्टॉक पर नजर, HTPS में यूनिट शुरू होने से बढ़ेगी खपत

कोरबा, 25 सितम्बर। छत्तीसगढ़ में घरेलू बिजली की मांग पूरी करने में उत्पादन कंपनी के ताप बिजली संयंत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कोरबा पश्चिम स्थित हसदेव ताप विद्युत गृह (HTPS) में फिलहाल करीब 1.50 लाख टन कोयले का स्टॉक उपलब्ध है। संयंत्र प्रबंधन के अनुसार यह स्टॉक फिलहाल क्रिटिकल स्थिति में नहीं है। हालांकि, 210 मेगावाट क्षमता वाली बंद यूनिट का मेंटेनेंस कार्य पूरा होने के बाद इसे दोबारा चालू किए जाने से संयंत्र में प्रतिदिन करीब 2 हजार टन कोयले की अतिरिक्त खपत बढ़ने की संभावना है। इसके चलते पिट-हेड पावर प्लांट को SECL की कुसमुंडा खदान से कोयले की आपूर्ति बढ़ानी होगी।

HTPS की पांच इकाइयों की कुल स्थापित क्षमता 1,340 मेगावाट है। इनमें से एक 210 मेगावाट की यूनिट रखरखाव कार्य के कारण बंद थी। मेंटेनेंस पूरा होने के बाद यूनिट के लाइटअप की प्रक्रिया से उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी होगी, लेकिन इसके साथ ही ईंधन की आवश्यकता भी बढ़ेगी। ऐसे में निर्बाध बिजली उत्पादन के लिए कोयला आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

इधर, अडानी समूह के पताढ़ी-उरगा स्थित कोरबा पावर लिमिटेड (KPL) में कोयला स्टॉक क्रिटिकल स्तर पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। 600 मेगावाट क्षमता वाले इस संयंत्र में दो उत्पादन इकाइयां हैं और इसकी कोयला जरूरतें SECL की खदानों से पूरी होती हैं। KPL की क्षमता को दूसरे चरण में बढ़ाकर 1,320 मेगावाट करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। विस्तार के बाद कोयले की आवश्यकता और बढ़ेगी, इसलिए भविष्य में ईंधन संकट से बचने के लिए निर्धारित योजना के अनुरूप कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी होगा।

कसाईपाली स्थित एक निजी ताप बिजली संयंत्र में भी कोयला स्टॉक क्रिटिकल स्तर तक पहुंचने की जानकारी है। यहां उत्पादित बिजली का उपयोग कोल वाशरी में कोयले की धुलाई के लिए किया जाता है। सामान्य तौर पर पांच दिन या उससे कम की खपत के बराबर कोयला स्टॉक क्रिटिकल स्तर माना जाता है।

वहीं, 440 मेगावाट क्षमता वाले पुराने कोरबा पूर्व संयंत्र के बंद होने के बाद खाली हुई जमीन पर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। इससे दिन में सौर ऊर्जा को स्टोर कर पीक आवर में ग्रिड के माध्यम से आपूर्ति की जा सकेगी। इसके अलावा बांगो डैम में प्रस्तावित 800 मेगावाट पंप स्टोरेज परियोजना को भी राज्य की दीर्घकालीन बिजली जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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