कोरबा, 25 सितम्बर। वन मंडल कोरबा कार्यालय परिसर में करीब 30 लाख रुपए की लागत से बनाया गया दोना-पत्तल निर्माण एवं प्रशिक्षण केंद्र इन दिनों बंद पड़ा है। केंद्र के मुख्य द्वार पर ताला लटक रहा है और भवन का उपयोग अब वन विभाग सामग्री रखने के लिए कर रहा है। रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना मशीन के वापस नहीं लौटने और माहुल पत्ते की खरीदी बंद होने के कारण लगभग निष्क्रिय हो गई है।
जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित, कोरबा द्वारा वर्ष 2009 में इस भवन का निर्माण कराया गया था। इसका उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों को दोना-पत्तल निर्माण का प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराना था। बाद में दोना-पत्तल निर्माण के लिए मशीन खरीदने जिला खनिज न्यास (DMF) से राशि उपलब्ध कराई गई। केंद्र का संचालन ढोढ़ीपारा के महिला समूह को सौंपा गया था। दोना-पत्तल निर्माण के लिए आवश्यक माहुल पत्ते की खरीदी गांव स्तर पर लघु वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से की जाती थी।
शुरुआती दौर में दोना-पत्तल की मांग अच्छी रही और इससे महिला समूहों को रोजगार भी मिला। करीब तीन वर्ष पहले रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) चिर्रा के उद्घाटन के दौरान यहां की मशीन वहां भेजी गई थी। रीपा का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया था। इसके बाद से मशीन वापस नहीं लाई गई। मशीन की वापसी के लिए कई बार पत्राचार किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन अब तक मशीन केंद्र में नहीं पहुंची है। रीपा का संचालन जिला पंचायत द्वारा किया जाता है।

दूसरी ओर माहुल पत्ते की खरीदी बंद होने से भी दोना-पत्तल निर्माण प्रभावित हुआ है। बताया गया कि लघु वनोपज यूनियन करीब 15 रुपए प्रति किलो की दर से माहुल पत्ते की खरीदी करती है, जबकि बाजार में व्यापारी इससे अधिक कीमत देते हैं। इसके कारण संग्रहणकर्ता यूनियन को पत्ता बेचने के बजाय बाजार में बेचने को प्राथमिकता देते हैं।
वन मंडल कार्यालय परिसर में संचालित चिरौंजी प्रसंस्करण केंद्र की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। यह केंद्र भी करीब एक वर्ष से बंद पड़ा है। सहायक प्रबंधक संध्या साहू के अनुसार चिरौंजी गुठली का पर्याप्त संग्रहण नहीं होने के कारण प्रसंस्करण कार्य प्रभावित हुआ है। यूनियन द्वारा चिरौंजी गुठली की खरीदी करीब 123 रुपए प्रति किलो की दर से की जाती है, जबकि बाजार में व्यापारी 150 रुपए से अधिक कीमत देते हैं।
इसी तरह जिला खनिज न्यास की राशि से दोंदरों-बालको क्षेत्र में बनाया गया लाख प्रसंस्करण केंद्र भी अब जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। दोना-पत्तल निर्माण को दोबारा शुरू करने के लिए हाइड्रोलिक मशीन खरीदने पांच लाख रुपए का प्रस्ताव DMF में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
डीएफओ प्रेमलता यादव प्रशिक्षण में होने के कारण वर्तमान में प्रभार संभाल रहे जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि दोना-पत्तल निर्माण और चिरौंजी प्रसंस्करण केंद्र को दोबारा शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। वर्तमान स्थिति की पूरी जानकारी लेने के बाद ही इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी जा सकेगी।







