कोरबा। जिले में स्थित बिजली उत्पादन कंपनी के झाबू-नवागांव राखड़ डैम के फूटने के बाद दर्री बैराज का पानी गंभीर रूप से प्रदूषित हो गया। हालात इतने बिगड़ गए कि बैराज के गेट खोलकर करीब पांच दिनों तक लगातार पानी हसदेव नदी में छोड़ना पड़ा। घटना के लगभग 20 दिन बीत जाने के बाद भी सिंचाई विभाग यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि बैराज से कुल कितना पानी बहाया गया। इसे लेकर विभाग की कार्यप्रणाली और संभावित कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, एचटीपीएस का राखड़ बांध डेढ़ महीने के भीतर दूसरी बार फूटा है। इससे पहले मार्च महीने में भी राखड़ डैम टूटने से राखड़युक्त पानी बैराज तक पहुंच गया था। उस मामले में सिंचाई विभाग ने जल प्रदूषण फैलाने के आरोप में बिजली उत्पादन कंपनी पर करीब 18 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। इसके बावजूद 20 अप्रैल को दोबारा डैम फूटने से लाखों टन राखड़ बहकर दर्री बैराज में पहुंच गया, जिससे पानी पूरी तरह मटमैला और प्रदूषित हो गया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 25 अप्रैल तक बैराज के गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। साथ ही नहरों में भी पानी प्रवाहित किया गया, जिस पर किसानों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। किसानों का कहना था कि सिंचाई के लिए छोड़े गए पानी में राखड़ और गंदगी होने से फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अधिक असर शहर की पेयजल व्यवस्था पर पड़ा। बैराज का पानी दूषित होने से लोगों को कई दिनों तक परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं पर्यावरण संरक्षण मंडल इस मामले में प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाने की कार्रवाई कर रहा है, लेकिन सिंचाई विभाग की ओर से अब तक दूसरी घटना में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
दर्री बैराज में प्रतिदिन जलस्तर और पानी छोड़ने का रिकॉर्ड रखा जाता है, इसके बावजूद विभाग अब तक यह आंकड़ा सार्वजनिक नहीं कर पाया है कि प्रदूषण कम करने के लिए कितनी मात्रा में पानी छोड़ा गया।
इस संबंध में हसदेव दर्री बैराज के कार्यपालन अभियंता एस.एन. साय ने बताया कि बैराज से छोड़े गए पानी की गणना कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित प्रबंधन को नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

