ताजमहल के इतिहास के अध्ययन के लिए कमेटी बनाने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर । सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल के वास्तविक इतिहास के अध्ययन के लिए जांच कमेटी गठित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस एमआर शाह की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि इस मामले में हाई कोर्ट ने बिल्कुल सही किया था। याचिका जनहित की बजाय प्रचार के लिए दाखिल की गई लगती है। याचिका डॉ. रजनीश सिंह ने दायर की थी। याचिका में मांग की गई थी कि ताजमहल के वास्तविक इतिहास के अध्ययन के लिए जांच कमेटी गठित की जाए ताकि इसके इतिहास को लेकर विवाद थम जाए।

याचिका में कहा गया था कि इस बात के वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं हैं कि मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल का निर्माण करवाया था। याचिकाकर्ता की ओर से वकील समीर श्रीवास्तव ने कहा कि मुमताज महल की याद में 1631 से लेकर 1653 के 22 वर्षों के दौरान ताजमहल के निर्माण का कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं मिलता है। याचिकाकर्ता को एनसीईआरटी से आरटीआई के तहत मिले जवाब में कहा गया है कि इस बात का कोई स्रोत नहीं है, जो ये बताए कि ताजमहल शाहजहां ने बनवाई थी।

उसके बाद याचिकाकर्ता ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के समक्ष आरटीआई के तहत सूचना मांगी लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके पहले याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि इस मामले की जांच और अध्ययन के लिए ताजमहल के 22 कमरों को सील किया जाए। हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि इस मामले को न्यायिक तरीके से हल नहीं किया जा सकता है। हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।