बालोद, 07 अक्टूबर। बालोद सत्र न्यायालय ने महिला की हत्या कर साक्ष्य छिपाने के मामले में आरोपी नेमीचंद साहू उर्फ नेमू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सत्र न्यायालय बालोद के पीठासीन न्यायाधीश एस.एल. नवरत्न की अदालत ने 6 अक्टूबर 2026 को मामले में फैसला सुनाते हुए हत्या के लिए उम्रकैद और साक्ष्य छिपाने के लिए पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अभियोजन के अनुसार मामला डौंडी लोहारा थाना क्षेत्र के अपराध क्रमांक 19/2026 से जुड़ा है। 16 जनवरी 2026 को आरोपी नेमीचंद साहू (29), निवासी ग्राम तरौद भाठापारा, थाना बालोद, ने ग्राम गुरमी स्थित नाला भेंजरा पठार के पास महिला कमला बाई राजपूत के सिर और चेहरे पर पत्थर से कई वार किए, जिससे उसकी मौत हो गई।
हत्या के बाद आरोपी ने घटना के साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। उसने मृतका के शव को पत्थरों से ढक दिया। इसके अलावा खून से सने कपड़ों को साफ किया और मृतका के मोबाइल फोन को तोड़ दिया, ताकि पुलिस को घटना से जुड़े सुराग न मिल सकें।
मामले की जांच के दौरान डौंडी लोहारा पुलिस ने आरोपी को 26 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया। विवेचना के दौरान पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किया गया पत्थर, आरोपी के खून से सने कपड़े, हीरो डीलक्स बाइक, मृतका का टूटा हुआ मोबाइल फोन और चूड़ियां बरामद कीं।
मामले की सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक तोमन लाल साहू ने अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए आरोपी को कठोर दंड दिए जाने की मांग की। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद आरोपी नेमीचंद साहू को हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी माना।
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या के अपराध में आजीवन कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। वहीं BNS की धारा 238 के तहत साक्ष्य छिपाने के अपराध में पांच वर्ष के सश्रम कारावास और 200 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड नहीं देने पर दो माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास होगा। न्यायालय ने दोनों सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है।







