नगरी,15 सितंबर । नगरी सिहावा क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा वनांचल में बसा हुआ है, जहां आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। खासकर बारिश के मौसम में नदी-नाले उफान पर आने के बाद ग्रामीणों का संपर्क आसपास के गांवों और ब्लॉक मुख्यालय नगरी से टूट जाता है। पुल-पुलिया नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं से लेकर आम ग्रामीणों तक को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जान जोखिम में डालकर नदी-नाले पार करने पड़ते हैं।स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए भी ग्रामीणों को इसी जोखिम भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है।
सबसे ज्यादा परेशानी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को उठानी पड़ती है। नगरी क्षेत्र के वनांचल गांवों में बारिश किसी आफत से कम नहीं होती। लगातार बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर आते ही कई गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूट जाता है। पुल-पुलिया नहीं होने के कारण ग्रामीणों के सामने नदी पार करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता।सोन्ढूर नदी में पानी बढ़ने के बाद आसपास के गांवों का संपर्क ब्लॉक मुख्यालय नगरी से कट जाता है। ऐसे में किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने पर स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को खाट पर लिटाकर नदी पार कराने की मजबूरी है। इतना ही नहीं, नदी के दूसरी ओर फंसी बाइक को भी ग्रामीण लकड़ी के सहारे बनाए गए अस्थायी ढोले से नदी पार कराने का जोखिम उठाते हैं।बारिश के दिनों में सोन्ढूर नदी पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को कई बार रास्ते में ही रुकना पड़ता है। वहीं, अगर वे गरियाबंद जिले की ओर से होकर ब्लॉक मुख्यालय पहुंचते हैं तो करीब 30 किलोमीटर की दूरी तय करने के बजाय लगभग 80 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है।
हाल ही में तीज त्यौहार के दौरान सामने आई तस्वीरें भी इस क्षेत्र की बदहाल स्थिति को बयां कर रही हैं। ग्रामीणों को बहते पानी के बीच नदी पार करते हुए देखा गया। वहीं, रिसगांव मार्ग पर आमाकड़ा नदी में एक ट्रैक्टर भी फंस गया, जिसे निकालने के लिए ग्रामीणों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।आजादी के 78 साल बाद भी नगरी के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। बारिश आते ही उनकी जिंदगी नदी-नालों के बीच सिमट जाती है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, मरीजों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
ग्रामीण लंबे समय से नदी-नालों पर पुल-पुलिया निर्माण की मांग शासन-प्रशासन से करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में यही परेशानी सामने आती है। कई बार मांग और शिकायत करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर उनके क्षेत्र में विकास की राह कब खुलेगी? नगरी के वनांचल क्षेत्र की ये तस्वीरें सिर्फ एक गांव या एक रास्ते की समस्या नहीं, बल्कि उन ग्रामीणों की हकीकत हैं जो आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शासन-प्रशासन इन ग्रामीणों को नदी-नालों के इस जोखिम भरे सफर से कब निजात दिलाएगा? पुल-पुलिया का निर्माण कब होगा और वनांचल क्षेत्र में विकास की वास्तविक शुरुआत कब होगी?







