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बायोफ्लॉक तकनीक से अजीत सिंह सुमन ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी, मत्स्य पालन से हर माह कमा रहे 1.08 लाख रुपये

कोरबा, 22 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लेकर कोरबा जिले के अनेक किसान आधुनिक तकनीक के माध्यम से मत्स्य पालन को रोजगार और आय का बेहतर साधन बना रहे हैं। कटघोरा विकासखंड के नेहरूनगर, छिर्रा निवासी अजीत सिंह सुमन भी ऐसे ही हितग्राही हैं, जिन्होंने बायोफ्लॉक तकनीक अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़े हैं।

योजना का लाभ मिलने से पहले अजीत सिंह सुमन पारंपरिक कृषि और मजदूरी पर निर्भर थे। सीमित आय और रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण परिवार के भरण-पोषण में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इसी दौरान मत्स्य पालन विभाग के माध्यम से उन्हें आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन की जानकारी मिली। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत आवेदन किया।

वर्ष 2024-25 में योजना के तहत अजीत सिंह सुमन को बायोफ्लॉक तालाब निर्माण और तारपौलिन (लाइनर) के लिए शासकीय सहायता प्राप्त हुई। सहायता मिलने के बाद उन्होंने बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन शुरू किया। यह तकनीक कम जगह और सीमित पानी में मछली पालन के माध्यम से अधिक उत्पादन की सुविधा देती है। इससे उनके लिए स्वरोजगार और अतिरिक्त आय का नया रास्ता खुला।

मत्स्य पालन शुरू करने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया। वर्तमान में वे मत्स्य पालन से लगभग 1 लाख 8 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रहे हैं। बढ़ी हुई आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है। आधुनिक तकनीक अपनाकर सफलतापूर्वक मत्स्य पालन करने के कारण क्षेत्र में उनकी पहचान एक प्रगतिशील किसान के रूप में बनी है।

अजीत सिंह सुमन के अनुसार, मत्स्य पालन विभाग की बायोफ्लॉक योजना उनके और उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है। कम जगह में आधुनिक तकनीक के जरिए मछली पालन शुरू करने से वे आत्मनिर्भर बनने के साथ अच्छी आय अर्जित कर पा रहे हैं। उन्होंने इसके लिए शासन और मत्स्य पालन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिले शासकीय सहयोग और विभागीय मार्गदर्शन ने अजीत सिंह सुमन के लिए स्वरोजगार का नया अवसर तैयार किया। बायोफ्लॉक तकनीक के माध्यम से उन्होंने अपनी आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाया है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं का प्रभावी उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायक हो सकता है।

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