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बच्ची से दरिंदगी, सगे चाचा को फांसी की सजा…

दुर्ग,11 सितंबर । मोहन नगर थाना क्षेत्र में 6 वर्षीय मासूम से दरिंदगी और निर्मम हत्या के बहुचर्चित मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने सगे चाचा की इस क्रूरता को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का अपराध मानते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई है।कोर्ट ने अपने सख्त आदेश में स्पष्ट लिखा है कि अभियुक्त को मृत्युदंड के लिए उसकी गर्दन में रस्सी का फंदा डालकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मौत न हो जाए। इसके साथ ही न्यायालय ने मृतका के परिजनों को आहत प्रतिकर योजना के तहत 7 लाख रुपए की सहायता राशि देने का निर्देश दिया है। नियमतः इस मृत्युदंड की अंतिम पुष्टि अब बिलासपुर हाईकोर्ट द्वारा की जाएगी।

विशेष लोक अभियोजक रुपवर्षा दिल्लीवार के अनुसार, यह रूह कंपा देने वाली वारदात 6 अप्रैल 2025 यानी रामनवमी के दिन हुई थी। मासूम बच्ची पड़ोस में ही स्थित अपनी बुआ-दादी के घर ‘नवकन्या भोज’ के लिए गई थी, लेकिन सुबह 10 बजे के बाद से वह अचानक लापता हो गई। परिजनों ने काफी खोजबीन के बाद मोहन नगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।पुलिस और परिजनों की सघन तलाश के बाद उसी रात करीब 9 बजे मासूम की बेहद क्षत-विक्षत लाश पास ही खड़ी एक कार में ड्राइवर और पीछे की सीट के बीच छिपी हुई मिली। इस जघन्य वारदात की जांच के लिए एएसपी पद्मश्री तंवर और टीआई शिव चंद्रा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी।

पुलिस की जांच में डीएनए, फॉरेंसिक रिपोर्ट (एफएसएल) और आरोपी के मेमोरेंडम बयान ने अहम भूमिका निभाई, जिसे अदालत ने मजबूत साक्ष्य माना। घटना के महज दो दिन बाद से ही आरोपी जेल में बंद था और अब 17 महीने 5 दिन बाद न्यायालय ने उसे मृत्युदंड व अर्थदंड की सजा सुनाकर मासूम को न्याय दिया है। डीएनए और वैज्ञानिक साक्ष्यों से खुला खौफनाक राज जांच में बड़ा खुलासा: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मासूम के साथ अत्यधिक क्रूरता की गई, जिससे उसे गहरा सदमा लगा और कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेलियर से उसकी मौत हो गई। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी चाचा पिछले 3 महीने से उसी घर की छत पर बने कमरे में रह रहा था।

163 पन्नों का फैसला: फॉरेंसिक साइंस और डीएनए रिपोर्ट ने पुलिस की थ्योरी पर मुहर लगा दी। अदालत ने अपने 163 पन्नों के फैसले में साफ लिखा कि यह मामला सिर्फ हत्या का नहीं है, बल्कि एक अबोध बच्ची के भरोसे और पवित्र रिश्ते के कत्ल का है। ऐसे कार तक पहुंचाया शव: पुलिस के मेमोरेंडम में आरोपी ने कबूल किया कि घटना के दिन बच्ची खेलते हुए छत पर आई थी। रिश्तेदार होने के कारण बच्ची उस पर भरोसा करती थी। इसी का फायदा उठाकर उसने इस घिनौने अपराध को अंजाम दिया। बच्ची की मौत के बाद वह घबरा गया। उसे पता था कि पड़ोस की कार का एक दरवाजा खराब है और सामने वाले घर का सीसीटीवी दिन में बंद रहता है। इसी का फायदा उठाकर उसने शव को कार की सीटों के बीच छिपा दिया।

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