- बिहान से मिली नई राह, स्व-सहायता समूह से जुड़कर कई आजीविका गतिविधियों को बनाया आय का जरिया
रायपुर, 21 सितंबर 2026। ग्राम पंचायत चुकतीपानी की बबली यादव ने मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास के दम पर अपनी जिंदगी में बदलाव की नई कहानी लिखी है। कभी परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित साधनों पर निर्भर रहने वाली बबली आज फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसी कई गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा रही हैं। उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही है।
बबली यादव जागृति महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार के नए अवसर मिले। समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर उन्होंने कंप्यूटर खरीदा और घर से ही फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर संबंधी काम शुरू किया। धीरे-धीरे यह काम उनकी नियमित आय का माध्यम बन गया। साथ ही गांव के लोगों को भी फोटो कॉपी, प्रिंटिंग और कंप्यूटर से जुड़ी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिलने लगीं।
मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी से बढ़े आय के स्रोत
बबली ने अपनी आजीविका को किसी एक व्यवसाय तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कम जगह में मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी मिलने लगी। इसके अलावा वे पीजी समूह के माध्यम से महुआ खरीदी के कार्य से भी जुड़ी हैं। इन गतिविधियों के जरिए वे स्वयं आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ ग्रामीण महिलाओं को भी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
करीब 10 हजार रुपये मासिक आय
फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी से बबली की मासिक आय करीब 10 हजार रुपये तक पहुंच गई है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। आय के नए साधन मिलने से उनमें निर्णय लेने और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे दूसरी महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
बिहान और सरकारी योजनाओं से मिला संबल
बबली यादव को प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिला है। इन योजनाओं से परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में सहयोग मिला। वहीं बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें समूह, ऋण और आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर मिला।
बबली की कहानी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में स्व-सहायता समूहों की भूमिका को भी सामने लाती है। छोटे स्तर से शुरू किए गए फोटो कॉपी के काम के साथ मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी को जोड़कर उन्होंने अपनी आय के कई स्रोत तैयार किए हैं।
आज चुकतीपानी की बबली यादव का छोटा-सा व्यवसाय उनके लिए सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की पहचान बन चुका है। उनकी कहानी यह बताती है कि उचित मार्गदर्शन, समूह का सहयोग और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं।







