रायपुर, 21 सितंबर 2026। धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड के सुदूर वनांचल क्षेत्र की रहने वाली सफीना बानो ने विपरीत परिस्थितियों के बीच हौसले और मेहनत से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। पति द्वारा परित्यक्त किए जाने के बाद बुजुर्ग मां की देखभाल, बच्ची के पालन-पोषण और परिवार का खर्च उठाने की जिम्मेदारी अकेले सफीना के कंधों पर आ गई थी। रोजगार और पैतृक संपत्ति का कोई साधन नहीं होने के कारण आर्थिक परेशानियां लगातार बढ़ रही थीं।
इसी दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग की सेक्टर पर्यवेक्षक ने सफीना को ‘सक्षम योजना’ की जानकारी दी। सफीना की परिस्थितियों और आगे बढ़ने की इच्छा को देखते हुए पर्यवेक्षक ने उनके घर पहुंचकर स्वरोजगार ऋण के लिए आवेदन करवाया। दिसंबर 2025 में सफीना को 2 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इस आर्थिक सहायता से उन्होंने मुर्गी और खरगोश पालन का व्यवसाय शुरू किया।
मेहनत और लगन से सफीना का कारोबार धीरे-धीरे बढ़ने लगा। फार्म में सैकड़ों मुर्गियां हो गईं और बिक्री से उन्हें अच्छी आमदनी होने लगी। इसके बाद उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार करते हुए ईंट-भट्ठा निर्माण का काम भी शुरू किया। आज वे अपनी मां की दवाइयों, घर के खर्च और बच्ची की पढ़ाई की जरूरतें स्वयं पूरी कर रही हैं।
सफीना बताती हैं कि एक समय लोग उन्हें ‘बेचारी’ कहकर बुलाते थे, लेकिन आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उनके शब्दों में, “पहले लोग मुझे बेचारी कहते थे, आज वही लोग मुझसे काम मांगने आते हैं।”
सफीना की कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी योजना का सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कठिन परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है। कभी आर्थिक तंगी से जूझ रही सफीना आज न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां उठा रही हैं, बल्कि अपने व्यवसाय के माध्यम से अन्य लोगों के लिए रोजगार का अवसर भी उपलब्ध करा रही हैं।







