रायपुर, 19 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में निजी मेडिकल कॉलेजों द्वारा विद्यार्थियों से निर्धारित वास्तविक खर्च से अधिक फीस वसूलने और अतिरिक्त राशि वापस नहीं करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में प्रार्थी निश्चय वाजपेयी ने रायपुर पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपकर संबंधित मेडिकल कॉलेजों के संचालकों, प्रबंधन और फीस वसूली के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज कर मामले की जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फीस विनियामक समिति के निर्णय और छत्तीसगढ़ शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश के बावजूद संबंधित मेडिकल कॉलेज विद्यार्थियों से वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस नहीं कर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने इसे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के आर्थिक हितों को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला बताया है।
तीन निजी मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त फीस वसूली का आरोप
शिकायत में तीन निजी मेडिकल कॉलेजों का उल्लेख किया गया है। इनमें प्रति विद्यार्थी वापस की जाने वाली अतिरिक्त फीस की राशि इस प्रकार बताई गई है।
शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, जुनवानी, भिलाई: 4,43,173 रुपए।
रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, भनसोज, ग्राम गोढ़ी, रायपुर: 4,53,593 रुपए।
बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, मोवा, रायपुर: 4,58,222 रुपए।
शिकायत के अनुसार, ये राशियां प्रति विद्यार्थी वापस किए जाने वाली अतिरिक्त फीस के रूप में दर्शाई गई है। हालांकि, इन आरोपों और राशि की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शासन के आदेश के बावजूद फीस नहीं लौटाने का आरोप
शिकायत में संदर्भ के तौर पर राज्य शासन द्वारा गठित प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति रायपुर के 3 अप्रैल 2025 के निर्णय और चिकित्सा शिक्षा विभाग के 23 सितंबर 2025 के आदेश का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज के मुताबिक, संबंधित विद्यार्थियों को एक महीने के भीतर अतिरिक्त फीस लौटाने तथा निर्धारित समय में राशि वापस नहीं करने की स्थिति में 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करने का प्रावधान बताया गया है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आदेश के बावजूद अतिरिक्त फीस की वापसी नहीं की गई।
भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने मामले की परिस्थितियों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 308, 316 और 223 सहित अन्य उपयुक्त धाराओं के तहत जांच की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यदि निर्धारित आदेश की जानकारी होने के बावजूद अतिरिक्त फीस वसूली जारी रखी गई और विद्यार्थियों को राशि वापस नहीं की गई तो मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग और अन्य संभावित अपराधों के पहलुओं की जांच की जानी चाहिए। साथ ही फीस के रूप में प्राप्त धनराशि के इस्तेमाल की भी जांच कराने की मांग की गई है।
वर्तमान शैक्षणिक सत्र में भी वसूली का आरोप
दस्तावेज में यह भी दावा किया गया है कि पूर्व में अतिरिक्त फीस वसूली को लेकर निर्णय और आदेश जारी होने के बावजूद वर्तमान शैक्षणिक सत्र में भी निर्धारित फीस से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित संस्थानों की भूमिका और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यह प्रकरण केवल फीस संबंधी विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि सक्षम समिति के निर्णय, शासन के आदेश तथा विद्यार्थियों एवं पालकों के आर्थिक हितों से संबंधित है। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले की गंभीरता से जांच कर उचित विधिक कार्रवाई की जाए।







