रायगढ़,10 सितंबर। जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में जंगली हाथी के हमले में एक युवक की मौत हो गई। वनपरिक्षेत्र बाकारूमा के तेजपुर बीट में युवक का सामना जंगल में विचरण कर रहे हाथी से हो गया। युवक ने हाथी को देखकर जान बचाने के लिए भागने की कोशिश की, लेकिन हाथी ने उसका पीछा किया और अपनी चपेट में लेकर कुचल दिया। हादसे में युवक की मौके पर ही मौत हो गई। घटना रात करीब 9 बजे की बताई जा रही है। मृतक की पहचान सुरेश चौहान पिता मदन चौहान के रूप में हुई है। वह जशपुर जिले केपत्थलगांव क्षेत्र का निवासी बताया गया है। जानकारी के अनुसार सुरेश किसी काम के सिलसिले में तेजपुर आया हुआ था।
रात के समय वह तेजपुर से ढोढागांव की ओर जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में अचानक उसका सामना एक जंगली हाथी से हो गया। बताया जा रहा है कि संबंधित क्षेत्र में हाथी के विचरण की जानकारी वन विभाग को पहले से थी। हाथी की गतिविधियों को देखते हुए विभागीय टीम लगातार उसकी निगरानी और ट्रैकिंग कर रही थी। आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को भी हाथी की मौजूदगी के संबंध में सतर्क किया गया था। वन विभाग की ओर से मुनादी और अन्य माध्यमों से ग्रामीणों को हाथी की गतिविधियों की जानकारी देते हुए सावधानी बरतने की अपील की गई थी। इसके बावजूद सुरेश रात में ढोढागांव की ओर निकल गया। रास्ते में अचानक हाथी सामने आ गया।
हाथी को देखते ही सुरेश ने खुद को बचाने के लिए वहां से भागने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि हाथी ने भी उसका पीछा करना शुरू कर दिया। कुछ दूरी तक पीछा करने के बाद हाथी ने युवक को अपनी चपेट में ले लिया और कुचल दिया। हमले में गंभीर चोट लगने के कारण सुरेश की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हुई और मौके पर पहुंची। विभागीय अमला घटनास्थल पर आवश्यक कार्रवाई करने के साथ हाथी की गतिविधियों पर भी नजर बनाए हुए है। युवक के शव के संबंध में निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इस घटना के बाद क्षेत्र में एक बार फिर हाथियों की मौजूदगी को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।
वन विभाग के लिए हाथी की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखना महत्वपूर्ण हो गया है, ताकि आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को समय रहते जानकारी दी जा सके और ऐसी घटनाओं को रोकने का प्रयास किया जा सके। धरमजयगढ़ वन मंडल के कई इलाकों में जंगली हाथियों का विचरण होता रहता है। ऐसे में हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में रात के समय आवागमन विशेष रूप से जोखिमपूर्ण हो सकता है। विभाग द्वारा हाथियों की लोकेशन और गतिविधियों के आधार पर आसपास के ग्रामीणों को सतर्क किया जाता है।







