दुर्ग, 24 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर शनिवार को दुर्ग जिले के अहिवारा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पद्म विभूषण तीजन बाई के नाम पर इसी वर्ष से लोककला अलंकरण प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही उनके गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित करने की पहल की जाएगी। मुख्यमंत्री ने महासम्मेलन में शामिल 70 कलाकार दलों को 25-25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ लोककला और संस्कृति की समृद्ध धरती है। यहां की लोककलाएं प्रदेश के इतिहास, जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। इनका संरक्षण और नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार लोककलाओं के संरक्षण और कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने पद्म विभूषण तीजन बाई के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अद्वितीय कला साधना से छत्तीसगढ़ की पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। पंडवानी ऐसी लोकविधा है, जिसमें कलाकार महाभारत की कथा को गायन, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से जीवंत करता है। तीजन बाई ने इस कला को दुनिया के अनेक मंचों तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि तीजन बाई की सांस्कृतिक विरासत को चिरस्थायी बनाने के लिए उनके गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही वहां के हाईस्कूल का नामकरण तीजन बाई के नाम पर करने की पहल होगी। उन्होंने बताया कि इसी वर्ष राज्योत्सव के अवसर से तीजन बाई के नाम पर लोककला अलंकरण प्रदान किया जाएगा। इससे प्रदेश के लोक कलाकारों को अपनी परंपरागत कलाओं को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी।
पंडवानी महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कलाकारों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए आयोजन में शामिल 70 दलों को 25-25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। इस तरह कुल 17 लाख 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इन दलों में पंडवानी कलाकारों के अलावा चार पंथी और तीन आदिवासी नृत्य दल भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास से जुड़ी मांगों को स्वीकार करते हुए ग्राम बानबरद के मिडिल स्कूल को हाईस्कूल में उन्नयन करने की घोषणा की। इसके अलावा अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी रोड का निर्माण भी कराया जाएगा। इन घोषणाओं से क्षेत्र में शिक्षा और सड़क सुविधाओं का विस्तार होगा।
मुख्यमंत्री साय ने ज्ञानश्रोत कला मंच के 46 वर्षों से लोककला और संस्कृति के संरक्षण में किए जा रहे योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्था ने कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री ने पद्मश्री डॉ. उषा बारले और आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा और स्थानीय कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड का गठन किया है। नवा रायपुर में फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ कलाकारों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि पंडवानी, पंथी, भरथरी, ददरिया और सुवा जैसी लोकविधाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान हैं। इन्हें जीवंत बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। विधायक रिकेश सेन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने स्वागत उद्बोधन में कलाकारों से जुड़ी विभिन्न मांगें मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं।
इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, साजा विधायक ईश्वर साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोक कलाकार और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।







