कोरबा, 02 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ में राजस्व पटवारी संघ की बेमियादी हड़ताल लगातार तेज होती जा रही है। कोरबा जिले में हड़ताल के 20वें दिन सोमवार को भी 175 पटवारी घंटाघर चौक स्थित धरना स्थल पर डटे रहे। खास बात यह है कि संघ के जिलाध्यक्ष मिथलेश कुमार वर्मा के निलंबन और सभी हड़ताली पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बावजूद आंदोलनकारियों के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। पटवारियों ने प्रशासन की कार्रवाई को दमनात्मक बताते हुए साफ कहा कि वे किसी भी दबाव में आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे और अपनी मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे।
राजस्व पटवारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर पटवारी 13 अक्टूबर से चार सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। हड़ताल के कारण जिले में राजस्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम प्रभावित हो रहे हैं। जमीन संबंधी प्रकरणों के निराकरण, राजस्व अभिलेखों में सुधार और फसल गिरदावरी जैसे कार्यों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। वहीं, 15 नवंबर से प्रस्तावित समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारियों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। धान खरीदी से पहले किसानों के रकबे और फसल संबंधी जानकारी का अद्यतन होना जरूरी है, लेकिन पटवारियों की अनुपस्थिति से यह काम प्रभावित होने की आशंका है।
जिलाध्यक्ष के निलंबन के बाद भी आंदोलन जारी
हड़ताल के बीच प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। कोरबा जिले में राजस्व पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष मिथलेश कुमार वर्मा को रविवार को निलंबित कर दिया गया। प्रशासन की ओर से जारी कार्रवाई के अनुसार, शासकीय दायित्वों के प्रति लापरवाही और उदासीनता के संबंध में जारी कारण बताओ नोटिस का समय पर संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं करने तथा सिविल सेवा आचरण नियमों के विपरीत कार्य व्यवहार पाए जाने के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
इसके अलावा जिले के 254 पटवारी हल्कों में पदस्थ 201 पटवारियों में से हड़ताल पर गए 175 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सोमवार को कार्यालयीन समय समाप्त होने तक किसी भी हड़ताली पटवारी के काम पर लौटने की सूचना प्रशासन को नहीं मिली। नोटिस और निलंबन की कार्रवाई के बावजूद सभी पटवारी घंटाघर चौक पर धरने में शामिल रहे।

‘जितनी बड़ी कार्रवाई होगी, उतनी मजबूती से जारी रहेगा आंदोलन’
राजस्व पटवारी संघ के जिला प्रवक्ता ओमप्रकाश प्रधान ने कहा कि पटवारी अपनी चार सूत्रीय जायज मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन कर रहे हैं। शासन की कई महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर राजस्व संबंधी कार्यों तक पटवारी जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय निलंबन, स्थानांतरण और नोटिस जैसी कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि कोरबा जिलाध्यक्ष का निलंबन केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे पटवारी संवर्ग की एकता को तोड़ने का प्रयास है। संघ ऐसी कार्रवाई से डरने वाला नहीं है। शासन जितनी अधिक दमनात्मक कार्रवाई करेगा, पटवारी उतनी ही ऊर्जा और मजबूती के साथ आंदोलन जारी रखेंगे।
धान खरीदी से पहले गिरदावरी कार्य प्रभावित होने की चिंता
पटवारी संघ ने धान खरीदी की तैयारियों के बीच प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। जिला प्रवक्ता ओमप्रकाश प्रधान का कहना है कि धान खरीदी से पहले किसानों के रकबे और फसल का विवरण अपडेट करना बेहद जरूरी है। इस काम में पटवारियों की अहम भूमिका होती है। ऐसे समय में पटवारियों की मांगों का समाधान करने के बजाय कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से ऐसा प्रतीत होता है कि किसानों का पूरा धान खरीदे जाने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
हालांकि, धान खरीदी पर हड़ताल का वास्तविक असर आगामी दिनों में प्रशासनिक तैयारियों और गिरदावरी कार्य की स्थिति से स्पष्ट होगा। फिलहाल हड़ताल जारी रहने से किसानों और आम नागरिकों के राजस्व संबंधी कामकाज पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
ये हैं पटवारियों की चार प्रमुख मांगें
- पटवारी संवर्ग से राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू की जाए।
- वर्ष 2017 में रोड-पे संशोधन के फलस्वरूप उत्पन्न वेतन विसंगति का निराकरण किया जाए।
- पीवी ऐप के स्थान पर डीसीएस के माध्यम से शुद्ध एवं त्रुटिरहित फसल गिरदावरी कराई जाए।
- आंदोलन की पृष्ठभूमि में की गई निलंबन, स्थानांतरण और कारण बताओ नोटिस संबंधी कार्रवाइयों को निरस्त किया जाए।
प्रशासन बोला- 175 को नोटिस, एक पटवारी निलंबित
इस पूरे मामले में अधीक्षक भू-अभिलेख कोरबा अमित झा ने बताया कि जिले में एक पटवारी को निलंबित किया गया है, जबकि हड़ताल में शामिल 175 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सोमवार को कार्यालयीन समयावधि तक किसी भी पटवारी के उपस्थिति देकर अपने कार्यस्थल पर लौटने की सूचना नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल कोरबा में पटवारियों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ प्रशासन कार्रवाई के जरिए कामकाज बहाल कराने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ पटवारी संघ अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती आम लोगों के राजस्व कार्यों और आगामी धान खरीदी की तैयारियों को प्रभावित होने से बचाने की है।







